पथामनीयन्त तथाधिवासना-
न्मधुव्रतानामपि दत्तविभ्रमाः ।
वितानतामातपनिर्भयास्तदा
पटच्छिदाकालिकपुष्पजाः स्रजः ॥
पथामनीयन्त तथाधिवासना-
न्मधुव्रतानामपि दत्तविभ्रमाः ।
वितानतामातपनिर्भयास्तदा
पटच्छिदाकालिकपुष्पजाः स्रजः ॥
न्मधुव्रतानामपि दत्तविभ्रमाः ।
वितानतामातपनिर्भयास्तदा
पटच्छिदाकालिकपुष्पजाः स्रजः ॥
अन्वयः
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तदा आतपनिर्भयाः पटच्छिदाकालिकपुष्पजाः स्रजः तथा अधिवासनात् मधुव्रतानाम् अपि दत्तविभ्रमाः (सत्यः) पथाम् वितानताम् अनीयन्त।
Summary
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Then, garlands made from cloth-pieces resembling unseasonal flowers, fearless of the sun, were stretched over the roads to form canopies. Their fragrance was so authentic that it even deluded the bees.
पदच्छेदः
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| पथाम् | पथिन् (६.३) | of the roads |
| अनीयन्त | अनीयन्त (√नी भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | were made to assume |
| तथा | तथा | so |
| अधिवासनात् | अधिवासना (५.१) | by their fragrance |
| मधुव्रतानाम् | मधुव्रत (६.३) | of the bees |
| अपि | अपि | even |
| दत्तविभ्रमाः | दत्तविभ्रम (१.३) | which caused delusion |
| वितानताम् | वितानता (२.१) | the state of canopies |
| आतपनिर्भयाः | आतपनिर्भय (१.३) | fearless of the sun |
| तदा | तदा | then |
| पटच्छिदाकालिकपुष्पजाः | पटत्–छिदा–अकालिक–पुष्प–जा (१.३) | made from unseasonal flowers of cloth-pieces |
| स्रजः | स्रज् (१.३) | garlands |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | था | म | नी | य | न्त | त | था | धि | वा | स | ना |
| न्म | धु | व्र | ता | ना | म | पि | द | त्त | वि | भ्र | माः |
| वि | ता | न | ता | मा | त | प | नि | र्भ | या | स्त | दा |
| प | ट | च्छि | दा | का | लि | क | पु | ष्प | जाः | स्र | जः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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