पुष्पैरभ्यर्च्य गन्धादिभिरपि सुभगैश्चारुहंसेन मां
चेन्निर्यान्तीं मन्त्रमूर्तिं जपति मयि मतिं न्यस्य मय्येव भक्त्- ।
अः तत्प्राप्ते वत्सरान्ते शिरसि करमसौ यस्य कस्यापि धत्ते
सोऽपि श्लोकानकाण्डे रचयति रुचिरान्कौतुकं दृश्यमस्याः ॥
पुष्पैरभ्यर्च्य गन्धादिभिरपि सुभगैश्चारुहंसेन मां
चेन्निर्यान्तीं मन्त्रमूर्तिं जपति मयि मतिं न्यस्य मय्येव भक्त्- ।
अः तत्प्राप्ते वत्सरान्ते शिरसि करमसौ यस्य कस्यापि धत्ते
सोऽपि श्लोकानकाण्डे रचयति रुचिरान्कौतुकं दृश्यमस्याः ॥
चेन्निर्यान्तीं मन्त्रमूर्तिं जपति मयि मतिं न्यस्य मय्येव भक्त्- ।
अः तत्प्राप्ते वत्सरान्ते शिरसि करमसौ यस्य कस्यापि धत्ते
सोऽपि श्लोकानकाण्डे रचयति रुचिरान्कौतुकं दृश्यमस्याः ॥
अन्वयः
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चेत् भक्तः मयि मतिम् न्यस्य मयि एव (स्थितः सन्) चारुहंसेन (सह) निर्यान्तीम् मन्त्रमूर्तिम् माम् सुभगैः पुष्पैः गन्धादिभिः अपि अभ्यर्च्य जपति, तत् वत्सरान्ते प्राप्ते, असौ यस्य कस्य अपि शिरसि करम् धत्ते, सः अपि अकाण्डे रुचिरान् श्लोकान् रचयति । अस्याः कौतुकम् दृश्यम् (अस्ति) ।
Summary
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"If a devotee, fixing his mind on me alone, worships me—the mantra's embodiment—with flowers and perfumes and chants, then after a year, on whosoever's head he places his hand, that person too composes beautiful verses extempore. The marvel of this is to be seen."
पदच्छेदः
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| पुष्पैः | पुष्प (३.३) | with flowers |
| अभ्यर्च्य | अभ्यर्च्य (अभि√अर्च+ल्यप्) | having worshipped |
| गन्धादिभिः | गन्धादि (३.३) | with perfumes etc. |
| अपि | अपि | also |
| सुभगैः | सुभग (३.३) | beautiful |
| चारुहंसेन | चारुहंस (३.१) | with a beautiful swan |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| चेत् | चेत् | if |
| निर्यान्तीम् | निर्यान्त् (निर्√या+शतृ, २.१) | departing |
| मन्त्रमूर्तिम् | मन्त्रमूर्ति (२.१) | the embodiment of the mantra |
| जपति | जपति (√जप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | chants |
| मयि | अस्मद् (७.१) | on me |
| मतिम् | मति (२.१) | mind |
| न्यस्य | न्यस्य (नि√अस्+ल्यप्) | having placed |
| मयि | अस्मद् (७.१) | in me |
| एव | एव | only |
| भक्तः | भक्त (१.१) | a devotee |
| तत् | तद् (७.१) | that |
| प्राप्ते | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, ७.१) | having arrived |
| वत्सरान्ते | वत्सरान्त (७.१) | at the end of a year |
| शिरसि | शिरस् (७.१) | on the head |
| करम् | कर (२.१) | hand |
| असौ | अदस् (१.१) | he |
| यस्य | यद् (६.१) | of whomever |
| कस्य | किम् (६.१) | of anyone |
| अपि | अपि | at all |
| धत्ते | धत्ते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | places |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अपि | अपि | even |
| श्लोकान् | श्लोक (२.३) | verses |
| अकाण्डे | अकाण्डे | extempore |
| रचयति | रचयति (√रच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | composes |
| रुचिरान् | रुचिर (२.३) | beautiful |
| कौतुकम् | कौतुक (१.१) | a marvel |
| दृश्यम् | दृश्य (√दृश्+ण्यत्, १.१) | to be seen |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of this (power) |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | ष्पै | र | भ्य | र्च्य | ग | न्धा | दि | भि | र | पि | सु | भ | गै | श्चा | रु | हं | से | न | मां | चे |
| न्नि | र्या | न्तीं | म | न्त्र | मू | र्तिं | ज | प | ति | म | यि | म | तिं | न्य | स्य | म | य्ये | व | भ | क्तः |
| त | त्प्रा | प्ते | व | त्स | रा | न्ते | शि | र | सि | क | र | म | सौ | य | स्य | क | स्या | पि | ध | त्ते |
| सो | ऽपि | श्लो | का | न | का | ण्डे | र | च | य | ति | रु | चि | रा | न्कौ | तु | कं | दृ | श्य | म | स्याः |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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