अर्थो विनैवार्थनयोपसीद-
न्नाल्पोऽपि धीरैरवधीरणीयः ।
मान्येन मन्ये विधिना वितीर्णः
स प्रीतिदायो बहु मन्तुमर्हः ॥
अर्थो विनैवार्थनयोपसीद-
न्नाल्पोऽपि धीरैरवधीरणीयः ।
मान्येन मन्ये विधिना वितीर्णः
स प्रीतिदायो बहु मन्तुमर्हः ॥
न्नाल्पोऽपि धीरैरवधीरणीयः ।
मान्येन मन्ये विधिना वितीर्णः
स प्रीतिदायो बहु मन्तुमर्हः ॥
अन्वयः
AI
अर्थनया विना एव उपसीदन् अल्पः अपि अर्थः धीरैः न अवधीरणीयः । मन्ये, मान्येन विधिना वितीर्णः सः प्रीतिदायः बहु मन्तुम् अर्हः (अस्ति) ।
Summary
AI
"A gift, even a small one, offered without any request, should not be slighted by the wise. I think that gift of affection, given in a respectable manner, deserves to be valued highly."
पदच्छेदः
AI
| अर्थः | अर्थ (१.१) | A gift |
| विना | विना | without |
| एव | एव | even |
| अर्थनया | अर्थना (३.१) | a request |
| उपसीदन् | उपसीदत् (उप√सद्+शतृ, १.१) | being offered |
| अल्पः | अल्प (१.१) | small |
| अपि | अपि | even |
| धीरैः | धीर (३.३) | by the wise |
| न | न | not |
| अवधीरणीयः | अवधीरणीय (अव√धृ+अनीयर्, १.१) | to be slighted |
| मान्येन | मान्य (३.१) | by a respectable |
| मन्ये | मन्ये (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I think |
| विधिना | विधि (३.१) | manner |
| वितीर्णः | वितीर्ण (वि√तॄ+क्त, १.१) | given |
| सः | तद् (१.१) | that |
| प्रीतिदायः | प्रीतिदाय (१.१) | gift of affection |
| बहु | बहु | highly |
| मन्तुम् | मन्तुम् (√मन्+तुमुन्) | to be valued |
| अर्हः | अर्ह (√अर्ह्+अच्, १.१) | deserves |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | र्थो | वि | नै | वा | र्थ | न | यो | प | सी | द |
| न्ना | ल्पो | ऽपि | धी | रै | र | व | धी | र | णी | यः |
| मा | न्ये | न | म | न्ये | वि | धि | ना | वि | ती | र्णः |
| स | प्री | ति | दा | यो | ब | हु | म | न्तु | म | र्हः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.