यत्राभिलाषस्तव तत्र देशे
नन्वस्तु धन्वन्यपि तूर्णमर्णः ।
आपो वहन्तीह हि लोकयात्रां
यथा न भूतानि तथाऽपराणि ॥
यत्राभिलाषस्तव तत्र देशे
नन्वस्तु धन्वन्यपि तूर्णमर्णः ।
आपो वहन्तीह हि लोकयात्रां
यथा न भूतानि तथाऽपराणि ॥
नन्वस्तु धन्वन्यपि तूर्णमर्णः ।
आपो वहन्तीह हि लोकयात्रां
यथा न भूतानि तथाऽपराणि ॥
अन्वयः
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तव यत्र देशे अभिलाषः, तत्र धन्वन् अपि तूर्णम् अर्णः ननु अस्तु । हि इह आपः यथा लोकयात्राम् वहन्ति, तथा अपराणि भूतानि न (वहन्ति) ।
Summary
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Wherever your desire lies, let an ocean quickly appear even in a desert. For indeed, waters sustain the course of the world in a way that other elements do not.
पदच्छेदः
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| यत्र | यत्र | where |
| अभिलाषः | अभिलाष (१.१) | desire |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| तत्र | तत्र | there |
| देशे | देश (७.१) | in the place |
| ननु | ननु | indeed |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| धन्वन् | धन्वन् (७.१) | in a desert |
| अपि | अपि | even |
| तूर्णम् | तूर्णम् | quickly |
| अर्णः | अर्णस् (१.१) | an ocean |
| आपः | अप् (१.३) | waters |
| वहन्ति | वहन्ति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | carry on |
| इह | इह | here |
| हि | हि | for |
| लोकयात्राम् | लोकयात्रा (२.१) | the course of the world |
| यथा | यथा | as |
| न | न | not |
| भूतानि | भूत (१.३) | elements |
| तथा | तथा | so |
| अपराणि | अपर (१.३) | other |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्रा | भि | ला | ष | स्त | व | त | त्र | दे | शे |
| न | न्व | स्तु | ध | न्व | न्य | पि | तू | र्ण | म | र्णः |
| आ | पो | व | ह | न्ती | ह | हि | लो | क | या | त्रां |
| य | था | न | भू | ता | नि | त | था | ऽप | रा | णि |
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