देव्यापि दिव्याऽनु तनुः प्रकाशी-
कृता मुदश्चक्रभृतः सृजन्ती ।
अनिह्नुतैस्तामवधार्य चिह्नै-
स्तद्वाचि बाला शिथिलाद्भुताभूत् ॥
देव्यापि दिव्याऽनु तनुः प्रकाशी-
कृता मुदश्चक्रभृतः सृजन्ती ।
अनिह्नुतैस्तामवधार्य चिह्नै-
स्तद्वाचि बाला शिथिलाद्भुताभूत् ॥
कृता मुदश्चक्रभृतः सृजन्ती ।
अनिह्नुतैस्तामवधार्य चिह्नै-
स्तद्वाचि बाला शिथिलाद्भुताभूत् ॥
अन्वयः
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चक्र-भृतः मुदः सृजन्ती दिव्या तनुः देव्या अपि अनु प्रकाशी-कृता । बाला अनिह्नुतैः चिह्नैः ताम् अवधार्य तत्-वाचि शिथिल-अद्भुता अभूत् ।
Summary
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Following Nala's speech, a divine form creating joy for Vishnu was also revealed by the goddess Lakshmi. The young Damayanti, recognizing her by her unconcealed signs, felt her wonder at her speech diminish.
पदच्छेदः
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| देव्या | देवी (३.१) | by the goddess |
| अपि | अपि | also |
| दिव्या | दिव्य (१.१) | divine |
| अनु | अनु | following |
| तनुः | तनु (१.१) | form |
| प्रकाशीकृता | प्रकाशीकृत (√कृ+च्वि+क्त, १.१) | was revealed |
| मुदः | मुद् (२.३) | joys |
| चक्रभृतः | चक्रभृत् (६.१) | of the discus-bearer (Vishnu) |
| सृजन्ती | सृजन्ती (√सृज्+शतृ+ङीप्, १.१) | creating |
| अनिह्नुतैः | अनिह्नुत (३.३) | by unconcealed |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| अवधार्य | अवधार्य (अव√धृ+ल्यप्) | having ascertained |
| चिह्नैः | चिह्न (३.३) | by signs |
| तद्वाचि | तद्वाच् (७.१) | in her speech |
| बाला | बाला (१.१) | the young woman |
| शिथिलाद्भुता | शिथिल–अद्भुत (१.१) | whose wonder was diminished |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व्या | पि | दि | व्या | ऽनु | त | नुः | प्र | का | शी |
| कृ | ता | मु | द | श्च | क्र | भृ | तः | सृ | ज | न्ती |
| अ | नि | ह्नु | तै | स्ता | म | व | धा | र्य | चि | ह्नै |
| स्त | द्वा | चि | बा | ला | शि | थि | ला | द्भु | ता | भूत् |
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