दृग्गोचरोऽभूदथ चित्रगुप्तः
कायस्थ उच्चैर्गुण एतदीयः ।
ऊर्ध्वं तु पत्त्रस्य मषीद एको
मषेर्ददञ्चोपरि पत्त्रमन्यः ॥
दृग्गोचरोऽभूदथ चित्रगुप्तः
कायस्थ उच्चैर्गुण एतदीयः ।
ऊर्ध्वं तु पत्त्रस्य मषीद एको
मषेर्ददञ्चोपरि पत्त्रमन्यः ॥
कायस्थ उच्चैर्गुण एतदीयः ।
ऊर्ध्वं तु पत्त्रस्य मषीद एको
मषेर्ददञ्चोपरि पत्त्रमन्यः ॥
अन्वयः
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अथ एतदीयः उच्चैः-गुणः कायस्थः चित्रगुप्तः दृक्-गोचरः अभूत् । तु एकः पत्त्रस्य ऊर्ध्वम् मषीदः (आसीत्), अन्यः च मषेः उपरि पत्त्रम् ददन् (आसीत्) ।
Summary
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Then, Yama's highly qualified scribe, Chitragupta, became visible. One of his hands was applying ink above the leaf, while the other was placing the leaf above the ink.
पदच्छेदः
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| दृग्गोचरः | दृश्–गोचर (१.१) | visible |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| अथ | अथ | then |
| चित्रगुप्तः | चित्रगुप्त (१.१) | Chitragupta |
| कायस्थः | कायस्थ (१.१) | the scribe |
| उच्चैर्गुणः | उच्चैस्–गुण (१.१) | of high qualities |
| एतदीयः | एतदीय (१.१) | his (Yama's) |
| ऊर्ध्वम् | ऊर्ध्वम् | above |
| तु | तु | and |
| पत्त्रस्य | पत्त्र (६.१) | of the leaf |
| मषीदः | मषीद (१.१) | giving ink |
| एकः | एक (१.१) | one |
| मषेः | मषी (६.१) | of the ink |
| ददन् | ददत् (√दा+शतृ, १.१) | placing |
| च | च | and |
| उपरि | उपरि | above |
| पत्त्रम् | पत्त्र (२.१) | the leaf |
| अन्यः | अन्य (१.१) | the other |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ग्गो | च | रो | ऽभू | द | थ | चि | त्र | गु | प्तः |
| का | य | स्थ | उ | च्चै | र्गु | ण | ए | त | दी | यः |
| ऊ | र्ध्वं | तु | प | त्त्र | स्य | म | षी | द | ए | को |
| म | षे | र्द | द | ञ्चो | प | रि | प | त्त्र | म | न्यः |
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