दृशोरपि न्यस्तमिवास्त राज्ञां
रागाद्दृगम्बुप्रतिबिम्बिमाल्यम् ।
नृपस्य तत्पीतवतोरिवाक्ष्णोः
प्रालम्ब्यमालम्बनयुक्तमन्तः ॥
दृशोरपि न्यस्तमिवास्त राज्ञां
रागाद्दृगम्बुप्रतिबिम्बिमाल्यम् ।
नृपस्य तत्पीतवतोरिवाक्ष्णोः
प्रालम्ब्यमालम्बनयुक्तमन्तः ॥
रागाद्दृगम्बुप्रतिबिम्बिमाल्यम् ।
नृपस्य तत्पीतवतोरिवाक्ष्णोः
प्रालम्ब्यमालम्बनयुक्तमन्तः ॥
अन्वयः
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राज्ञाम् अपि दृशोः रागात् दृक्-अम्बु-प्रतिबिम्बि-माल्यं न्यस्तम् इव आस्त । नृपस्य अन्तः पीतवतोः इव अक्ष्णोः तत् प्रालम्ब्यम् आलम्बन-युक्तम् (आस्त) ।
Summary
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For the other kings, the garland, reflected in their love-induced tears, seemed placed in their eyes. For Nala, that same hanging garland seemed to have found support inside his eyes, as if they had drunk it in.
पदच्छेदः
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| दृशोः | दृश् (७.२) | in the eyes |
| अपि | अपि | also |
| न्यस्तम् | न्यस्त (नि√अस्+क्त, १.१) | placed |
| इव | इव | as if |
| आस्त | आस्त (√आस् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of the kings |
| रागात् | राग (५.१) | due to love |
| दृगम्बुप्रतिबिम्बिमाल्यम् | दृश्–अम्बु–प्रतिबिम्बिन्–माल्य (१.१) | the garland reflected in the tears |
| नृपस्य | नृप (६.१) | of the king (Nala) |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| पीतवतोः | पीतवत् (√पा+क्तवतु, ६.२) | of the two that had drunk |
| इव | इव | as if |
| अक्ष्णोः | अक्षि (६.२) | of the two eyes |
| प्रालम्ब्यम् | प्रालम्ब्य (प्र√लम्ब्+ण्यत्, १.१) | the hanging garland |
| आलम्बनयुक्तम् | आलम्बन–युक्त (१.१) | provided with support |
| अन्तः | अन्तर् | inside |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | शो | र | पि | न्य | स्त | मि | वा | स्त | रा | ज्ञां |
| रा | गा | द्दृ | ग | म्बु | प्र | ति | बि | म्बि | मा | ल्यम् |
| नृ | प | स्य | त | त्पी | त | व | तो | रि | वा | क्ष्णोः |
| प्रा | ल | म्ब्य | मा | ल | म्ब | न | यु | क्त | म | न्तः |
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