तन्न्यस्तमाल्यस्पृशि यन्नलस्य
स्वेदं करे पञ्चशरश्चकार ।
भविष्यदुद्वाहमहोत्सवस्य
हस्तोदकं तज्जनयांबभूव ॥
तन्न्यस्तमाल्यस्पृशि यन्नलस्य
स्वेदं करे पञ्चशरश्चकार ।
भविष्यदुद्वाहमहोत्सवस्य
हस्तोदकं तज्जनयांबभूव ॥
स्वेदं करे पञ्चशरश्चकार ।
भविष्यदुद्वाहमहोत्सवस्य
हस्तोदकं तज्जनयांबभूव ॥
अन्वयः
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पञ्चशरः नलस्य तत्-न्यस्त-माल्य-स्पृशि करे यत् स्वेदं चकार, तत् भविष्यत्-उद्वाह-महा-उत्सवस्य हस्त-उदकं जनयांबभूव ।
Summary
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The perspiration that Kamadeva caused on Nala's hand as it touched the garland placed by her, became the ceremonial water-offering for the great festival of their future marriage.
पदच्छेदः
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| तन्न्यस्तमाल्यस्पृशि | तद्–न्यस्त (नि√न्यस्+क्त)–माल्य–स्पृश् (७.१) | on the hand that touched the garland placed by her |
| यत् | यद् (२.१) | which |
| नलस्य | नल (६.१) | Nala's |
| स्वेदं | स्वेद (२.१) | perspiration |
| करे | कर (७.१) | on the hand |
| पञ्चशरः | पञ्चशर (१.१) | Kamadeva |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused |
| भविष्यदुद्वाहमहोत्सवस्य | भविष्यत्–उद्वाह–महा–उत्सव (६.१) | of the future great festival of marriage |
| हस्तोदकं | हस्त–उदक (२.१) | the ceremonial water |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| जनयांबभूव | जनयांबभूव (√जन् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | न्न्य | स्त | मा | ल्य | स्पृ | शि | य | न्न | ल | स्य |
| स्वे | दं | क | रे | प | ञ्च | श | र | श्च | का | र |
| भ | वि | ष्य | दु | द्वा | ह | म | हो | त्स | व | स्य |
| ह | स्तो | द | कं | त | ज्ज | न | यां | ब | भू | व |
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