अथाभिलिख्येव समर्प्यमाणां
राजिं निजस्वीकरणाक्षराणाम् ।
दूर्वाङ्कुराढ्यां नलकण्ठनाले
वधूर्मधूकस्रजमुत्ससर्ज ॥
अथाभिलिख्येव समर्प्यमाणां
राजिं निजस्वीकरणाक्षराणाम् ।
दूर्वाङ्कुराढ्यां नलकण्ठनाले
वधूर्मधूकस्रजमुत्ससर्ज ॥
राजिं निजस्वीकरणाक्षराणाम् ।
दूर्वाङ्कुराढ्यां नलकण्ठनाले
वधूर्मधूकस्रजमुत्ससर्ज ॥
अन्वयः
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अथ वधूः निज-स्वीकरण-अक्षराणां राजिम् अभिलिख्य इव समर्प्यमाणाम् दूर्व-अङ्कुर-आढ्यां मधूक-स्रजं नल-कण्ठ-नाले उत्ससर्ज ।
Summary
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Then the bride (Damayanti) placed the Madhuka garland, rich with Durva grass shoots, on the stalk-like neck of Nala, as if writing and offering a line of letters signifying her acceptance.
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| अभिलिख्य | अभिलिख्य (अभि√लिख्+ल्यप्) | having written |
| इव | इव | as if |
| समर्प्यमाणाम् | समर्प्यमाण (सम्√ऋ+णिच्+शानच्, २.१) | being offered |
| राजिम् | राजि (२.१) | a line |
| निजस्वीकरणाक्षराणाम् | निज–स्वीकरण–अक्षर (६.३) | of the letters of her own acceptance |
| दूर्वाङ्कुराढ्याम् | दूर्व–अङ्कुर–आढ्य (२.१) | rich with Durva grass shoots |
| नलकण्ठनाले | नल–कण्ठ–नाल (७.१) | on the stalk-like neck of Nala |
| वधूः | वधू (१.१) | the bride |
| मधूकस्रजम् | मधूक–स्रज् (२.१) | the Madhuka garland |
| उत्ससर्ज | उत्ससर्ज (उत्√सृज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | placed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | भि | लि | ख्ये | व | स | म | र्प्य | मा | णां |
| रा | जिं | नि | ज | स्वी | क | र | णा | क्ष | रा | णाम् |
| दू | र्वा | ङ्कु | रा | ढ्यां | न | ल | क | ण्ठ | ना | ले |
| व | धू | र्म | धू | क | स्र | ज | मु | त्स | स | र्ज |
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