मन्दाक्षनिस्पन्दतनोर्मनोभू-
दुष्प्रेरमप्यानयति स्म तस्याः ।
मधूकमालामधुरं करं सा
कण्ठोपकण्ठं वसुधासुधांशोः ॥
मन्दाक्षनिस्पन्दतनोर्मनोभू-
दुष्प्रेरमप्यानयति स्म तस्याः ।
मधूकमालामधुरं करं सा
कण्ठोपकण्ठं वसुधासुधांशोः ॥
दुष्प्रेरमप्यानयति स्म तस्याः ।
मधूकमालामधुरं करं सा
कण्ठोपकण्ठं वसुधासुधांशोः ॥
अन्वयः
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सा मन्दाक्ष-निस्पन्द-तनोः तस्याः मनोभू-दुष्प्रेरम् अपि मधूक-माला-मधुरं करं वसुधा-सुधांशोः कण्ठ-उपकण्ठम् आनयति स्म ।
Summary
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She (Saraswati) brought the hand of Damayanti—who was motionless with shyness and whose hand was sweet with the Madhuka garland and difficult to move even for Kamadeva—near the neck of Nala, the moon on earth.
पदच्छेदः
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| मन्दाक्षनिस्पन्दतनोः | मन्दाक्ष–निस्पन्द–तनु (६.१) | of her whose body was motionless due to shyness |
| मनोभूदुष्प्रेरम् | मनोभू–दुष्प्रेर (२.१) | difficult to be impelled by Kamadeva |
| अपि | अपि | even |
| आनयति स्म | आनयति स्म (आ√नी कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | brought |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| मधूकमालामधुरं | मधूक–माला–मधुर (२.१) | sweet with the Madhuka garland |
| करं | कर (२.१) | hand |
| सा | तद् (१.१) | she (Saraswati) |
| कण्ठोपकण्ठं | कण्ठ–उपकण्ठ (२.१) | near the neck |
| वसुधासुधांशोः | वसुधा–सुधांशु (६.१) | of the moon on earth (Nala) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न्दा | क्ष | नि | स्प | न्द | त | नो | र्म | नो | भू |
| दु | ष्प्रे | र | म | प्या | न | य | ति | स्म | त | स्याः |
| म | धू | क | मा | ला | म | धु | रं | क | रं | सा |
| क | ण्ठो | प | क | ण्ठं | व | सु | धा | सु | धां | शोः |
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