इति श्रुतेऽस्या वचसैव हास्या-
त्कृत्वा सलास्याधरमास्यबिम्बम् ।
भ्रूविभ्रमाकूतकृताभ्यनुज्ञे-
ष्वेतेषु तां साथ नलाय निन्ये ॥
इति श्रुतेऽस्या वचसैव हास्या-
त्कृत्वा सलास्याधरमास्यबिम्बम् ।
भ्रूविभ्रमाकूतकृताभ्यनुज्ञे-
ष्वेतेषु तां साथ नलाय निन्ये ॥
त्कृत्वा सलास्याधरमास्यबिम्बम् ।
भ्रूविभ्रमाकूतकृताभ्यनुज्ञे-
ष्वेतेषु तां साथ नलाय निन्ये ॥
अन्वयः
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अथ अस्याः इति वचसा श्रुते (सति), एतेषु हास्यात् सलास्य-अधरम् आस्य-बिम्बं कृत्वा भ्रू-विभ्रम-आकूत-कृत-अभ्यनुज्ञेषु (सत्सु), सा ताम् नलाय निन्ये ।
Summary
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Then, upon hearing these words of hers, the gods smiled, making their lips dance, and gave their permission through the playful movement of their eyebrows. She (Saraswati) then led her (Damayanti) to Nala.
पदच्छेदः
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| इति | इति | thus |
| श्रुते | श्रुत (√श्रु+क्त, ७.१) | having been heard |
| अस्याः | इदम् (६.१) | her |
| वचसा | वचस् (३.१) | by the words |
| एव | एव | just |
| हास्यात् | हास्य (५.१) | from a smile |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| सलास्याधरम् | स–लास्य–अधर (२.१) | lips dancing |
| आस्यबिम्बम् | आस्य–बिम्ब (२.१) | the orb of the face |
| भ्रूविभ्रमाकूतकृताभ्यनुज्ञेषु | भ्रू–विभ्रम–आकूत–कृत (√कृ+क्त)–अभ्यनुज्ञा (७.३) | when they had given permission through the intention shown by the play of their eyebrows |
| एतेषु | एतद् (७.३) | these (gods) |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| सा | तद् (१.१) | she (Saraswati) |
| अथ | अथ | then |
| नलाय | नल (४.१) | to Nala |
| निन्ये | निन्ये (√नी कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | led |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | श्रु | ते | ऽस्या | व | च | सै | व | हा | स्या |
| त्कृ | त्वा | स | ला | स्या | ध | र | मा | स्य | बि | म्बम् |
| भ्रू | वि | भ्र | मा | कू | त | कृ | ता | भ्य | नु | ज्ञे |
| ष्वे | ते | षु | तां | सा | थ | न | ला | य | नि | न्ये |
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