देवी कथंचित्खलु तामदेव-
द्रीचीं भवन्तीं स्मितसिक्तसृक्का ।
आह स्म मां प्रत्यपि ते पुनः का
शङ्का शशाङ्कादधिकास्यबिम्बे ॥
देवी कथंचित्खलु तामदेव-
द्रीचीं भवन्तीं स्मितसिक्तसृक्का ।
आह स्म मां प्रत्यपि ते पुनः का
शङ्का शशाङ्कादधिकास्यबिम्बे ॥
द्रीचीं भवन्तीं स्मितसिक्तसृक्का ।
आह स्म मां प्रत्यपि ते पुनः का
शङ्का शशाङ्कादधिकास्यबिम्बे ॥
अन्वयः
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देवी कथञ्चित् अदेव-द्रीचीम् भवन्तीम् ताम्, स्मित-सिक्त-सृक्का (सती), खलु आह स्म - 'शश-अङ्कात् अधिक-आस्य-बिम्बे (नले) माम् प्रति अपि ते पुनः का शङ्का?'
Summary
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The goddess, her lips moistened with a smile, somehow spoke to Damayanti, who was turning away from the gods: 'What hesitation do you have again, even towards me, regarding him (Nala) whose face is more radiant than the moon?'
पदच्छेदः
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| देवी | देवी (१.१) | the goddess |
| कथंचित् | कथञ्चित् | somehow |
| खलु | खलु | indeed |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| अदेवद्रीचीम् | अदेवद्रीची (२.१) | who was not turning towards the gods |
| भवन्तीम् | भवन्ती (√भू+शतृ, २.१) | being |
| स्मितसिक्तसृक्का | स्मित–सिक्त–सृक्का (१.१) | whose corners of the mouth were moistened with a smile |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| स्म | स्म | (particle for past tense) |
| माम् | अस्मद् (२.१) | towards me |
| प्रति | प्रति | towards |
| अपि | अपि | even |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| पुनः | पुनर् | again |
| का | किम् (१.१) | what |
| शङ्का | शङ्का (१.१) | hesitation |
| शशाङ्कात् | शशाङ्क (५.१) | than the moon |
| अधिक | अधिक | more |
| आस्यबिम्बे | आस्य–बिम्ब (७.१) | in the face-orb |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | वी | क | थं | चि | त्ख | लु | ता | म | दे | व |
| द्री | चीं | भ | व | न्तीं | स्मि | त | सि | क्त | सृ | क्का |
| आ | ह | स्म | मां | प्र | त्य | पि | ते | पु | नः | का |
| श | ङ्का | श | शा | ङ्का | द | धि | का | स्य | बि | म्बे |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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