यत्तान्निजे सा हृदि भावनाया
बलेन साक्षादकृताखिलस्थान् ।
अभूदभीष्टप्रतिभूः स तस्या
वरं हि दृष्टा ददते परं ते ॥
यत्तान्निजे सा हृदि भावनाया
बलेन साक्षादकृताखिलस्थान् ।
अभूदभीष्टप्रतिभूः स तस्या
वरं हि दृष्टा ददते परं ते ॥
बलेन साक्षादकृताखिलस्थान् ।
अभूदभीष्टप्रतिभूः स तस्या
वरं हि दृष्टा ददते परं ते ॥
अन्वयः
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यत् सा तान् अखिलस्थान् निजे हृदि भावनायाः बलेन साक्षात् अकृत, सः (साक्षात्कारः) तस्याः अभीष्ट-प्रतिभूः अभूत् । हि ते दृष्टाः (सन्तः) परं वरं ददते ।
Summary
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Because she visualized all of them directly in her own heart through the power of her meditation, that very visualization became a guarantor of her desired boon. For those gods, when seen (even mentally), grant the highest boons.
पदच्छेदः
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| यत् | यत् | because |
| तान् | तद् (२.३) | them |
| निजे | निज (७.१) | in her own |
| सा | तद् (१.१) | she |
| हृदि | हृद् (७.१) | heart |
| भावनायाः | भावना (६.१) | of meditation |
| बलेन | बल (३.१) | by the power |
| साक्षात् | साक्षात् | directly |
| अकृत | अकृत (√कृ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made/visualized |
| अखिलस्थान् | अखिल–अखिलस्थ (√स्था+क, २.३) | who were in all places |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| अभीष्टप्रतिभूः | अभीष्ट–प्रतिभू (१.१) | a guarantor of the desired |
| सः | तद् (१.१) | that (act of visualization) |
| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| वरम् | वर (२.१) | boon |
| हि | हि | for |
| दृष्टाः | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.३) | being seen |
| ददते | ददते (√दा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | grant |
| परम् | पर (२.१) | the highest |
| ते | तद् (१.३) | they |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्ता | न्नि | जे | सा | हृ | दि | भा | व | ना | या |
| ब | ले | न | सा | क्षा | द | कृ | ता | खि | ल | स्थान् |
| अ | भू | द | भी | ष्ट | प्र | ति | भूः | स | त | स्या |
| व | रं | हि | दृ | ष्टा | द | द | ते | प | रं | ते |
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