श्रद्धामयीभूय सुपर्वणस्ता-
न्ननाम नामग्रहणाग्रकं सा ।
सुरेषु हि श्रद्दधतां नमस्य
सर्वार्थसिद्ध्यङ्गमिथः समस्या ॥
श्रद्धामयीभूय सुपर्वणस्ता-
न्ननाम नामग्रहणाग्रकं सा ।
सुरेषु हि श्रद्दधतां नमस्य
सर्वार्थसिद्ध्यङ्गमिथः समस्या ॥
न्ननाम नामग्रहणाग्रकं सा ।
सुरेषु हि श्रद्दधतां नमस्य
सर्वार्थसिद्ध्यङ्गमिथः समस्या ॥
अन्वयः
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सा श्रद्धामयी भूय तान् सुपर्वणः नामग्रहण-अग्रकं ननाम । हि सुरेषु श्रद्दधताम् नमस्य सर्व-अर्थ-सिद्धि-अङ्गम् (भवति), (तयोः) इथः समस्या (इव अस्ति) ।
Summary
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Filled with faith, she (Damayanti) bowed to the gods, mentioning their names first. Indeed, for those who have faith in the gods, reverence is the means to accomplish all objectives; these two are mutually complementary.
पदच्छेदः
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| श्रद्धामयीभूय | श्रद्धामयी–भूय (√भू+क्त्वा) | having become full of faith |
| सुपर्वणः | सुपर्वन् (२.३) | the gods |
| तान् | तद् (२.३) | them |
| ननाम | ननाम (√नम् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bowed |
| नामग्रहणाग्रकम् | नाम–ग्रहण–अग्रक (२.१) | with the mentioning of names first |
| सा | तद् (१.१) | she |
| सुरेषु | सुर (७.३) | towards the gods |
| हि | हि | indeed |
| श्रद्दधताम् | श्रद्दधत् (श्रत्√धा+शतृ, ६.३) | of those who have faith |
| नमस्य | नमस्य (१.१) | reverence |
| सर्वार्थसिद्ध्यङ्गम् | सर्व–अर्थ–सिद्धि–अङ्ग (१.१) | is the means for the accomplishment of all objectives |
| इथः | इथः | mutually |
| समस्या | समस्या (१.१) | a complementary part |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्र | द्धा | म | यी | भू | य | सु | प | र्व | ण | स्ता |
| न्न | ना | म | ना | म | ग्र | ह | णा | ग्र | कं | सा |
| सु | रे | षु | हि | श्र | द्द | ध | तां | न | म | स्य |
| स | र्वा | र्थ | सि | द्ध्य | ङ्ग | मि | थः | स | म | स्या |
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