त्वत्तः श्रुतं नेति नले मयातः
परं वदस्वेत्युदिताथ देव्या ।
ह्रीमन्मथद्वैरथरङ्गभूमी
भैमी दृशा भाषितनैषधाभूत् ॥
त्वत्तः श्रुतं नेति नले मयातः
परं वदस्वेत्युदिताथ देव्या ।
ह्रीमन्मथद्वैरथरङ्गभूमी
भैमी दृशा भाषितनैषधाभूत् ॥
परं वदस्वेत्युदिताथ देव्या ।
ह्रीमन्मथद्वैरथरङ्गभूमी
भैमी दृशा भाषितनैषधाभूत् ॥
अन्वयः
AI
अथ देव्या 'त्वत्तः नले 'न' इति मया श्रुतम्, अतः परम् वदस्व' इति उदिता, ह्री-मन्मथ-द्वैरथ-रङ्ग-भूमी भैमी दृशा भाषित-नैषधा अभूत् ।
Summary
AI
Then, addressed by the goddess, 'I heard a 'no' from you regarding Nala; therefore, speak further,' Damayanti, who was the battlefield for the duel between shyness and love, spoke of Nala with her eyes.
पदच्छेदः
AI
| त्वत्तः | युष्मद् (५.१) | from you |
| श्रुतम् | श्रुत (√श्रु+क्त, १.१) | was heard |
| न | न | no |
| इति | इति | thus |
| नले | नल (७.१) | regarding Nala |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अतः | अतः | therefore |
| परम् | पर (२.१) | further |
| वदस्व | वदस्व (√वद् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | speak |
| इति | इति | thus |
| उदिता | उदित (√वद्+क्त, १.१) | spoken to |
| अथ | अथ | then |
| देव्या | देवी (३.१) | by the goddess |
| ह्रीमन्मथद्वैरथरङ्गभूमी | ह्री–मन्मथ–द्वैरथ–रङ्गभूमी (१.१) | the battlefield for the duel between shyness and love |
| भैमी | भैमी (१.१) | Damayanti |
| दृशा | दृश् (३.१) | with her eyes |
| भाषितनैषधा | भाषित–नैषध (१.१) | she who spoke of Nala |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | त्तः | श्रु | तं | ने | ति | न | ले | म | या | तः |
| प | रं | व | द | स्वे | त्यु | दि | ता | थ | दे | व्या |
| ह्री | म | न्म | थ | द्वै | र | थ | र | ङ्ग | भू | मी |
| भै | मी | दृ | शा | भा | षि | त | नै | ष | धा | भूत् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.