करे विधृत्येश्वरया गिरां सा
पान्था पथीन्द्रस्य कृता विहस्य ।
वामेति नामैव बभाज सार्धं
पुरन्ध्रिसाधारणसंविभागम् ॥
करे विधृत्येश्वरया गिरां सा
पान्था पथीन्द्रस्य कृता विहस्य ।
वामेति नामैव बभाज सार्धं
पुरन्ध्रिसाधारणसंविभागम् ॥
पान्था पथीन्द्रस्य कृता विहस्य ।
वामेति नामैव बभाज सार्धं
पुरन्ध्रिसाधारणसंविभागम् ॥
अन्वयः
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गिराम् ईश्वरया करे विधृत्य विहस्य पथि-इन्द्रस्य पान्था कृता सा, पुरन्ध्रि-साधारण-संविभागम् 'वामा' इति नाम एव सार्धम् बभाज ।
Summary
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Held by the hand by Sarasvati, the mistress of words, and made a traveler on the right path with a smile, she acquired the name 'Vama' (contrary one), a title she shared with all women.
पदच्छेदः
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| करे | कर (७.१) | by the hand |
| विधृत्य | विधृत्य (वि√धृ+ल्यप्) | having held |
| ईश्वरया | ईश्वरा (३.१) | by the mistress |
| गिराम् | गिर् (६.३) | of words |
| सा | तद् (१.१) | she |
| पान्था | पान्थ (१.१) | a traveler |
| पथीन्द्रस्य | पथि–इन्द्र (६.१) | of the king of paths |
| कृता | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | having smiled |
| वामा | वामा (१.१) | a contrary woman |
| इति | इति | thus |
| नाम | नामन् (२.१) | the name |
| एव | एव | just |
| बभाज | बभाज (√भज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | acquired |
| सार्धम् | सार्धम् | along with |
| पुरन्ध्रिसाधारणसंविभागम् | पुरन्ध्रि–साधारण–संविभाग (२.१) | the share common to all women |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रे | वि | धृ | त्ये | श्व | र | या | गि | रां | सा |
| पा | न्था | प | थी | न्द्र | स्य | कृ | ता | वि | ह | स्य |
| वा | मे | ति | ना | मै | व | ब | भा | ज | सा | र्धं |
| पु | र | न्ध्रि | सा | धा | र | ण | सं | वि | भा | गम् |
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