देव्याः श्रुतौ नेति नलार्धनाम्नि
गृहीत एव त्रपया निपीता ।
अथाङ्गुलीरङ्गुलिभिर्मृशन्ती
दूरं शिरः सा नमयांचकार ॥
देव्याः श्रुतौ नेति नलार्धनाम्नि
गृहीत एव त्रपया निपीता ।
अथाङ्गुलीरङ्गुलिभिर्मृशन्ती
दूरं शिरः सा नमयांचकार ॥
गृहीत एव त्रपया निपीता ।
अथाङ्गुलीरङ्गुलिभिर्मृशन्ती
दूरं शिरः सा नमयांचकार ॥
अन्वयः
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अथ देव्याः श्रुतौ नल-अर्ध-नाम्नि गृहीते एव, 'न' इति (वाणी) त्रपया निपीता । सा अङ्गुलीः अङ्गुलिभिः मृशन्ती शिरः दूरम् नमयांचकार ।
Summary
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Then, as soon as half of Nala's name was uttered within the goddess's hearing, the word 'no' was swallowed by her shyness. Fidgeting with her fingers, she bowed her head low.
पदच्छेदः
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| देव्याः | देवी (६.१) | of the goddess |
| श्रुतौ | श्रुति (७.१) | in the hearing |
| न | न | no |
| इति | इति | thus |
| नलार्धनाम्नि | नल–अर्ध–नामन् (७.१) | when half the name 'Nala' |
| गृहीते | गृहीत (√ग्रह्+क्त, ७.१) | was uttered |
| एव | एव | just |
| त्रपया | त्रपा (३.१) | by shyness |
| निपीता | निपीत (नि√पा+क्त, १.१) | was swallowed |
| अथ | अथ | then |
| अङ्गुलीः | अङ्गुलि (२.३) | fingers |
| अङ्गुलिभिः | अङ्गुलि (३.३) | with fingers |
| मृशन्ती | मृशन्ती (√मृश्+शतृ, १.१) | touching |
| दूरम् | दूरम् | low |
| शिरः | शिरस् (२.१) | her head |
| सा | तद् (१.१) | she |
| नमयांचकार | नमयांचकार (√नम् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bowed |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व्याः | श्रु | तौ | ने | ति | न | ला | र्ध | ना | म्नि |
| गृ | ही | त | ए | व | त्र | प | या | नि | पी | ता |
| अ | था | ङ्गु | ली | र | ङ्गु | लि | भि | र्मृ | श | न्ती |
| दू | रं | शि | रः | सा | न | म | यां | च | का | र |
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