कथं कथंचिन्निषधेश्वरस्य
कृत्वास्यपद्मं दरवीक्षितश्रि ।
वाग्देवताया वदनेन्दुबिम्बं
त्रपावती साकृत सामिदृष्टम् ॥
कथं कथंचिन्निषधेश्वरस्य
कृत्वास्यपद्मं दरवीक्षितश्रि ।
वाग्देवताया वदनेन्दुबिम्बं
त्रपावती साकृत सामिदृष्टम् ॥
कृत्वास्यपद्मं दरवीक्षितश्रि ।
वाग्देवताया वदनेन्दुबिम्बं
त्रपावती साकृत सामिदृष्टम् ॥
अन्वयः
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सा त्रपावती कथम् कथञ्चित् निषध-ईश्वरस्य आस्य-पद्मम् दर-वीक्षित-श्रि कृत्वा, वाक्-देवतायाः वदन-इन्दु-बिम्बम् सामि-दृष्टम् अकृत ।
Summary
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With great difficulty, the shy Damayanti, having made Nala's lotus-face the object of a slight glance, then cast a half-glance at the moon-like face of Sarasvati, the goddess of speech.
पदच्छेदः
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| कथम् | कथम् | somehow |
| कथञ्चित् | कथञ्चित् | with great difficulty |
| निषधेश्वरस्य | निषध–ईश्वर (६.१) | of the lord of Nishadha |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| आस्यपद्मम् | आस्य–पद्म (२.१) | the lotus-face |
| दरवीक्षितश्रि | दर–वीक्षित–श्रि (२.१) | whose beauty is slightly seen |
| वाग्देवतायाः | वाच्–देवता (६.१) | of the goddess of speech |
| वदनेन्दुबिम्बम् | वदन–इन्दु–बिम्ब (२.१) | the moon-like face |
| त्रपावती | त्रपावत् (१.१) | the shy one |
| सा | तद् (१.१) | she |
| अकृत | अकृत (√कृ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | made |
| सामिदृष्टम् | सामि–दृष्ट (२.१) | half-seen |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | थं | क | थं | चि | न्नि | ष | धे | श्व | र | स्य |
| कृ | त्वा | स्य | प | द्मं | द | र | वी | क्षि | त | श्रि |
| वा | ग्दे | व | ता | या | व | द | ने | न्दु | बि | म्बं |
| त्र | पा | व | ती | सा | कृ | त | सा | मि | दृ | ष्टम् |
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