तस्या हृदि व्रीडमनोभवाभ्यां
दोलाविलासं समवाप्यमाने ।
स्थितं धृतैणाङ्ककुलातपत्रे
शृङ्गारमालिङ्गदधीश्वरश्रीः ॥
तस्या हृदि व्रीडमनोभवाभ्यां
दोलाविलासं समवाप्यमाने ।
स्थितं धृतैणाङ्ककुलातपत्रे
शृङ्गारमालिङ्गदधीश्वरश्रीः ॥
दोलाविलासं समवाप्यमाने ।
स्थितं धृतैणाङ्ककुलातपत्रे
शृङ्गारमालिङ्गदधीश्वरश्रीः ॥
अन्वयः
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तस्याः हृदि व्रीड-मनोभवाभ्याम् दोला-विलासम् समवाप्यमाने (सति), अधीश्वर-श्रीः धृत-ऐण-अङ्क-कुल-आतपत्रे स्थितम् शृङ्गारम् आलिङ्गत् ।
Summary
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While her heart was being made to swing between shyness and love, the royal splendor (of Nala) embraced the sentiment of love (Shringara), which was situated under the royal umbrella of the moon's lineage.
पदच्छेदः
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| तस्याः | तद् (६.१) | her |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| व्रीडमनोभवाभ्याम् | व्रीड–मनोभव (३.२) | by shyness and love |
| दोलाविलासम् | दोला–विलास (२.१) | the play of a swing |
| समवाप्यमाने | समवाप्यमान (सम्+अव√आप्+णिच्+शानच्, ७.१) | while being made to attain |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, २.१) | situated |
| धृतैणाङ्ककुलातपत्रे | धृत (√धृ+क्त)–ऐण–अङ्क–कुल–आतपत्र (७.१) | under the royal umbrella of the moon's lineage |
| शृङ्गारम् | शृङ्गार (२.१) | the sentiment of love |
| आलिङ्गत् | आलिङ्गत् (आ√लिङ्ग् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | embraced |
| अधीश्वरश्रीः | अधीश्वर–श्री (१.१) | the royal splendor |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्या | हृ | दि | व्री | ड | म | नो | भ | वा | भ्यां |
| दो | ला | वि | ला | सं | स | म | वा | प्य | मा | ने |
| स्थि | तं | धृ | तै | णा | ङ्क | कु | ला | त | प | त्रे |
| शृ | ङ्गा | र | मा | लि | ङ्ग | द | धी | श्व | र | श्रीः |
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