श्रियं भजन्तां कियदस्य देवा-
श्छाया नलस्यास्ति तथापि नैषाम् ।
इतीरयन्तीव तया निरैक्षि
सा नैषधे न त्रिदशेषु तेषु ॥
श्रियं भजन्तां कियदस्य देवा-
श्छाया नलस्यास्ति तथापि नैषाम् ।
इतीरयन्तीव तया निरैक्षि
सा नैषधे न त्रिदशेषु तेषु ॥
श्छाया नलस्यास्ति तथापि नैषाम् ।
इतीरयन्तीव तया निरैक्षि
सा नैषधे न त्रिदशेषु तेषु ॥
अन्वयः
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अस्य नलस्य छाया कियत् श्रियम् भजन्ताम्? तथापि एषाम् देवानाम् (छाया) न अस्ति । इति ईरयन्ती इव सा तया (सरस्वत्या) तेषु त्रिदशेषु न, (किन्तु) नैषधे निरैक्षि ।
Summary
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"How much splendor can the gods partake from this Nala's reflection? Even so, they do not possess it." As if thinking this, she (Damayanti) was guided by her (Sarasvati's) gaze not towards the gods, but towards Nala.
पदच्छेदः
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| श्रियम् | श्री (२.१) | splendor |
| भजन्ताम् | भजन्ताम् (√भज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them partake |
| कियत् | कियत् | how much |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| देवाः | देव (१.३) | gods |
| छाया | छाया (१.१) | reflection |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| तथापि | तथापि | even so |
| न | न | not |
| एषाम् | एतद् (६.३) | of these |
| इति | इति | thus |
| ईरयन्ती | ईरयन्ती (√ईर्+शतृ, १.१) | as if saying |
| इव | इव | as if |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| निरैक्षि | निरैक्षि (निर्√ईक्ष् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was looked at |
| सा | तद् (१.१) | she |
| नैषधे | नैषध (७.१) | on Nala |
| न | न | not |
| त्रिदशेषु | त्रिदश (७.३) | on the gods |
| तेषु | तद् (७.३) | on those |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रि | यं | भ | ज | न्तां | कि | य | द | स्य | दे | वा |
| श्छा | या | न | ल | स्या | स्ति | त | था | पि | नै | षाम् |
| इ | ती | र | य | न्ती | व | त | या | नि | रै | क्षि |
| सा | नै | ष | धे | न | त्रि | द | शे | षु | ते | षु |
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