सुरेषु नापश्यदवैक्षताक्ष्णो-
र्निमेषमुर्वीभृति संमुखी सा ।
इह त्वमागत्य नले मिलेति
संज्ञानदानादिव भाषमाणम् ॥
सुरेषु नापश्यदवैक्षताक्ष्णो-
र्निमेषमुर्वीभृति संमुखी सा ।
इह त्वमागत्य नले मिलेति
संज्ञानदानादिव भाषमाणम् ॥
र्निमेषमुर्वीभृति संमुखी सा ।
इह त्वमागत्य नले मिलेति
संज्ञानदानादिव भाषमाणम् ॥
अन्वयः
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सा संमुखी (सती) सुरेषु अक्ष्णोः निमेषं न अपश्यत् । उर्वी-भृति (नले) तु 'त्वम् इह आगत्य नले मिल' इति संज्ञा-दानात् इव भाषमाणं निमेषम् अवैक्षत ।
Summary
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Facing them, she did not see blinking in the eyes of the gods. However, in the king (Nala), she observed blinking, which seemed to be speaking, as if giving a signal: "You, come here and unite with Nala."
पदच्छेदः
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| सुरेषु | सुर (७.३) | on the gods |
| न | न | not |
| अपश्यत् | अपश्यत् (√दृश् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she saw |
| अवैक्षत | अवैक्षत (अव√ईक्ष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she observed |
| अक्ष्णोः | अक्षिन् (६.२) | of the eyes |
| निमेषम् | निमेष (२.१) | blinking |
| उर्वीभृति | उर्वीभृत् (७.१) | on the king (earth-bearer) |
| संमुखी | संमुखी (१.१) | facing |
| सा | तद् (१.१) | she |
| इह | इह | here |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| आगत्य | आगत्य (आ√गम्+ल्यप्) | having come |
| नले | नल (७.१) | with Nala |
| मिल | मिल (√मिल् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | unite |
| इति | इति | thus |
| संज्ञानदानादिव | संज्ञा–दान (५.१)–इव | as if from giving a signal |
| भाषमाणम् | भाषमाण (√भाष्+शानच्, २.१) | speaking |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | रे | षु | ना | प | श्य | द | वै | क्ष | ता | क्ष्णो |
| र्नि | मे | ष | मु | र्वी | भृ | ति | सं | मु | खी | सा |
| इ | ह | त्व | मा | ग | त्य | न | ले | मि | ले | ति |
| सं | ज्ञा | न | दा | ना | दि | व | भा | ष | मा | णम् |
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