निश्चित्य शेषं तमसौ नरेशं
प्रमोदमेदस्वितरान्तराभूत् ।
देव्या गिरां भावितभङ्गिराख्य-
च्चित्तेन चिन्तार्णवयादसेयम् ॥
निश्चित्य शेषं तमसौ नरेशं
प्रमोदमेदस्वितरान्तराभूत् ।
देव्या गिरां भावितभङ्गिराख्य-
च्चित्तेन चिन्तार्णवयादसेयम् ॥
प्रमोदमेदस्वितरान्तराभूत् ।
देव्या गिरां भावितभङ्गिराख्य-
च्चित्तेन चिन्तार्णवयादसेयम् ॥
अन्वयः
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असौ तं नरेशं शेषं निश्चित्य प्रमोद-मेदस्वितर-अन्तरा अभूत् । इयं गिरां देव्या भावित-भङ्गिः (सती) चित्तेन चिन्ता-अर्णव-यादसे आख्यत् ।
Summary
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Having thus determined that king to be the remaining one (Nala), she became filled with immense joy. She, whose manner of speech was inspired by the goddess of words, communicated this to her heart, which was like a creature in the ocean of anxiety.
पदच्छेदः
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| निश्चित्य | निश्चित्य (निस्√चि+ल्यप्) | having determined |
| शेषम् | शेष (२.१) | as the remaining one |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| असौ | अदस् (१.१) | she |
| नरेशम् | नरेश (२.१) | king |
| प्रमोदमेदस्वितरान्तरा | प्रमोद–मेदस्वितर–अन्तर (१.१) | one whose inside became fatter with joy |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| देव्या | देवी (३.१) | by the goddess |
| गिराम् | गिर् (६.३) | of words |
| भावितभङ्गिः | भावि–भङ्गि (१.१) | whose manner was inspired |
| आख्यत् | आख्यत् (आ√ख्या कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | told |
| चित्तेन | चित्त (३.१) | with her mind |
| चिन्तार्णवयादसे | चिन्ता–अर्णव–यादस् (४.१) | to the sea-monster in the ocean of anxiety |
| इयम् | इदम् (१.१) | this one |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | श्चि | त्य | शे | षं | त | म | सौ | न | रे | शं |
| प्र | मो | द | मे | द | स्वि | त | रा | न्त | रा | भूत् |
| दे | व्या | गि | रां | भा | वि | त | भ | ङ्गि | रा | ख्य |
| च्चि | त्ते | न | चि | न्ता | र्ण | व | या | द | से | यम् |
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