सानन्दं तनुजाविवाहनमहे भीमः स भूमीपति-
र्वैदर्भीनिषधेश्वरौ नृपजनानिष्टोक्तिनिर्मृष्टये ।
स्वानि स्वानि धराधिपाश्च शिबिराण्युद्दिश्य यान्तः क्रमा-
देको द्वौ बहबश्चकार सृजतः स्मातेनिरे मङ्गलम् ॥
सानन्दं तनुजाविवाहनमहे भीमः स भूमीपति-
र्वैदर्भीनिषधेश्वरौ नृपजनानिष्टोक्तिनिर्मृष्टये ।
स्वानि स्वानि धराधिपाश्च शिबिराण्युद्दिश्य यान्तः क्रमा-
देको द्वौ बहबश्चकार सृजतः स्मातेनिरे मङ्गलम् ॥
र्वैदर्भीनिषधेश्वरौ नृपजनानिष्टोक्तिनिर्मृष्टये ।
स्वानि स्वानि धराधिपाश्च शिबिराण्युद्दिश्य यान्तः क्रमा-
देको द्वौ बहबश्चकार सृजतः स्मातेनिरे मङ्गलम् ॥
अन्वयः
AI
सः भूमीपतिः भीमः सानन्दम् तनुजाविवाहनमहे नृपजन अनिष्ट उक्ति निर्मृष्टये मङ्गलम् चकार । वैदर्भीनिषधेश्वरौ मङ्गलम् सृजतः स्म । स्वानि स्वानि शिबिराणि उद्दिश्य क्रमात् यान्तः धराधिपाः च मङ्गलम् आतेनिरे । (इति) एकः, द्वौ, बहवः (त्रयः अपि) ।
Summary
AI
King Bhima joyfully performed auspicious rites for his daughter's wedding to counteract the other kings' ill-will. Damayanti and Nala created auspiciousness, and the other kings, departing for their camps, also performed auspicious rites. Thus did one, two, and many engage in auspicious activities.
पदच्छेदः
AI
| सानन्दम् | सानन्दम् | joyfully |
| तनुजाविवाहनमहे | तनुजाविवाहनमह (७.१) | in the great festival of his daughter's wedding |
| भीमः | भीम (१.१) | Bhima |
| सः | तद् (१.१) | that |
| भूमीपतिः | भूमीपति (१.१) | king |
| वैदर्भीनिषधेश्वरौ | वैदर्भीनिषधेश्वर (१.२) | Damayanti and the lord of Nishadha |
| नृपजन | नृपजन | of the assembly of kings |
| अनिष्ट | अनिष्ट | unpleasant |
| उक्ति | उक्ति | words |
| निर्मृष्टये | निर्मृष्टि (४.१) | for wiping away |
| स्वानि | स्व (२.३) | their own |
| स्वानि | स्व (२.३) | respective |
| धराधिपाः | धराधिप (१.३) | kings |
| च | च | and |
| शिबिराणि | शिबिर (२.३) | camps |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (उद्√दिश्+ल्यप्) | heading towards |
| यान्तः | यान्त् (√या+शतृ, १.३) | going |
| क्रमात् | क्रमात् | in order |
| एकः | एक (१.१) | one (Bhima) |
| द्वौ | द्वि (१.२) | two (the couple) |
| बहवः | बहु (१.३) | many (the kings) |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | performed |
| सृजतः | सृजतः (√सृज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | were creating |
| स्म | स्म | (indicates past tense) |
| आतेनिरे | आतेनिरे (आ√तन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | performed |
| मङ्गलम् | मङ्गल (२.१) | auspicious rites |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | न | न्दं | त | नु | जा | वि | वा | ह | न | म | हे | भी | मः | स | भू | मी | प | ति |
| र्वै | द | र्भी | नि | ष | धे | श्व | रौ | नृ | प | ज | ना | नि | ष्टो | क्ति | नि | र्मृ | ष्ट | ये |
| स्वा | नि | स्वा | नि | ध | रा | धि | पा | श्च | शि | बि | रा | ण्यु | द्दि | श्य | या | न्तः | क्र | मा |
| दे | को | द्वौ | ब | ह | ब | श्च | का | र | सृ | ज | तः | स्मा | ते | नि | रे | म | ङ्ग | लम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.