एतन्मदीयमतिवञ्चकपञ्चकस्थे
नाथे कथं नु मनुजस्य चकास्तु चिह्नम् ।
लक्ष्माणि तानि किममी न वहन्ति हन्त
बर्हिर्मुखा धुतरजस्तनुतामुखानि ॥
एतन्मदीयमतिवञ्चकपञ्चकस्थे
नाथे कथं नु मनुजस्य चकास्तु चिह्नम् ।
लक्ष्माणि तानि किममी न वहन्ति हन्त
बर्हिर्मुखा धुतरजस्तनुतामुखानि ॥
नाथे कथं नु मनुजस्य चकास्तु चिह्नम् ।
लक्ष्माणि तानि किममी न वहन्ति हन्त
बर्हिर्मुखा धुतरजस्तनुतामुखानि ॥
अन्वयः
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एतत्-मदीय-मति-वञ्चक-पञ्चक-स्थे नाथे मनुजस्य चिह्नं कथं नु चकास्तु? हन्त, किम् अमी बर्हिर्मुखाः धुत-रजः-तनुता-मुखानि तानि लक्ष्माणि न वहन्ति?
Summary
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"Among this group of five who are deceiving my mind, how can the sign of a mortal shine on my lord? Alas, have these gods concealed their divine signs—being free from dust, having unwinking eyes, and so on—which they should bear?"
पदच्छेदः
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| एतन्मदीयमतिवञ्चकपञ्चकस्थे | एतत्–मदीय–मति–वञ्चक–पञ्चक–स्थ (७.१) | in this group of five who deceive my mind |
| नाथे | नाथ (७.१) | on my lord |
| कथं | कथम् | how |
| नु | नु | indeed |
| मनुजस्य | मनुज (६.१) | of a mortal |
| चकास्तु | चकास्तु (√चकास् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can shine |
| चिह्नम् | चिह्न (१.१) | the sign |
| लक्ष्मणि | लक्ष्मन् (१.३) | signs |
| तानि | तद् (१.३) | those |
| किम् | किम् | Do |
| अमी | अदस् (१.३) | these |
| न | न | not |
| वहन्ति | वहन्ति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | bear |
| हन्त | हन्त | Alas |
| बर्हिर्मुखाः | बर्हिर्मुख (१.३) | gods |
| धुतरजस्तनुतामुखानि | धुत (√धू+क्त)–रजस्–तनुता–मुख (१.३) | being free from dust, having slender bodies, etc. |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | न्म | दी | य | म | ति | व | ञ्च | क | प | ञ्च | क | स्थे |
| ना | थे | क | थं | नु | म | नु | ज | स्य | च | का | स्तु | चि | ह्नम् |
| ल | क्ष्मा | णि | ता | नि | कि | म | मी | न | व | ह | न्ति | ह | न्त |
| ब | र्हि | र्मु | खा | धु | त | र | ज | स्त | नु | ता | मु | खा | नि |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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