दण्डं बिभर्त्ययमहो जगतस्ततः स्या-
त्कम्पाकुलस्य सकलस्य न पङ्कपातः ।
स्वर्वैद्ययोरपि मदव्ययदायिनीभि-
रेतस्य रुग्भिरमरः किमु कश्चिदस्ति ॥
दण्डं बिभर्त्ययमहो जगतस्ततः स्या-
त्कम्पाकुलस्य सकलस्य न पङ्कपातः ।
स्वर्वैद्ययोरपि मदव्ययदायिनीभि-
रेतस्य रुग्भिरमरः किमु कश्चिदस्ति ॥
त्कम्पाकुलस्य सकलस्य न पङ्कपातः ।
स्वर्वैद्ययोरपि मदव्ययदायिनीभि-
रेतस्य रुग्भिरमरः किमु कश्चिदस्ति ॥
अन्वयः
AI
अहो, अयम् दण्डम् बिभर्ति । ततः कम्प-आकुलस्य सकलस्य जगतः पङ्क-पातः न स्यात् । स्वः-वैद्ययोः अपि मद-व्यय-दायिनीभिः एतस्य रुग्भिः (ग्रस्तः) कश्चित् अमरः किम् उ अस्ति?
Summary
AI
Oh, this one (Yama) wields the staff of punishment. Therefore, the entire world, trembling in agitation, does not fall into sin. Is there any immortal who is not afflicted by his diseases, which are capable of destroying the pride of even the two celestial physicians (the Ashvins)?
पदच्छेदः
AI
| दण्डम् | दण्ड (२.१) | the staff/punishment |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he bears |
| अयम् | इदम् (१.१) | this one |
| अहो | अहो | Oh! |
| जगतः | जगत् (६.१) | of the world |
| ततः | ततस् | therefore |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| कम्प-आकुलस्य | कम्प–आकुल (६.१) | of the one agitated with trembling |
| सकलस्य | सकल (६.१) | of the entire |
| न | न | not |
| पङ्क-पातः | पङ्कपात (१.१) | falling into sin |
| स्वः-वैद्ययोः | स्वर्वैद्य (६.२) | of the two physicians of heaven |
| अपि | अपि | even |
| मद-व्यय-दायिनीभिः | मद–व्यय–दायिन् (३.३) | by those which cause the decline of pride |
| एतस्य | एतद् (६.१) | his |
| रुग्भिः | रुज् (३.३) | by the diseases |
| अमरः | अमर (१.१) | immortal |
| किम् | किम् | is |
| उ | उ | (question particle) |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) | any |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there? |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | ण्डं | बि | भ | र्त्य | य | म | हो | ज | ग | त | स्त | तः | स्या |
| त्क | म्पा | कु | ल | स्य | स | क | ल | स्य | न | प | ङ्क | पा | तः |
| स्व | र्वै | द्य | यो | र | पि | म | द | व्य | य | दा | यि | नी | भि |
| रे | त | स्य | रु | ग्भि | र | म | रः | कि | मु | क | श्चि | द | स्ति |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.