अस्यारिप्रकरः शरश्च नृपतेः संख्ये पतन्तावुभौ
सीत्कारं च न संमुखौ रचयतः कम्पं च न प्राप्नुतः ।
तद्युक्तं न पुनर्निवृत्तिरुभयोर्जागर्ति यन्मुक्तयो-
रेकस्तत्र भिनत्ति मित्रमपरश्चामित्रमित्यद्भुतम् ॥
अस्यारिप्रकरः शरश्च नृपतेः संख्ये पतन्तावुभौ
सीत्कारं च न संमुखौ रचयतः कम्पं च न प्राप्नुतः ।
तद्युक्तं न पुनर्निवृत्तिरुभयोर्जागर्ति यन्मुक्तयो-
रेकस्तत्र भिनत्ति मित्रमपरश्चामित्रमित्यद्भुतम् ॥
सीत्कारं च न संमुखौ रचयतः कम्पं च न प्राप्नुतः ।
तद्युक्तं न पुनर्निवृत्तिरुभयोर्जागर्ति यन्मुक्तयो-
रेकस्तत्र भिनत्ति मित्रमपरश्चामित्रमित्यद्भुतम् ॥
अन्वयः
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अस्य नृपतेः अरि-प्रकरः शरः च उभौ संख्ये पतन्तौ (अपि) संमुखौ (सन्तौ) सीत्कारम् न रचयतः, कम्पम् च न प्राप्नुतः । तत् युक्तम् । पुनः यत् मुक्तयोः उभयोः निवृत्तिः न जागर्ति, तत्र एकः मित्रम् (सूर्यम्) भिनत्ति, अपरः च अमित्रम् भिनत्ति इति अद्भुतम् ।
Summary
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Both the host of this king's enemies and his arrow, though falling in battle, do not cry out or tremble. That is fitting. But the wonder is this: once released, neither returns, yet one (the arrow) pierces 'mitra' (the sun), while the other (the enemy) pierces the 'amitra' (enemy).
पदच्छेदः
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| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| अरिप्रकरः | अरि–प्रकर (१.१) | the host of enemies |
| शरः | शर (१.१) | arrow |
| च | च | and |
| नृपतेः | नृपति (६.१) | of the king |
| संख्ये | संख्य (७.१) | in battle |
| पतन्तौ | पतत् (√पत्+शतृ, १.२) | falling |
| उभौ | उभ (१.२) | both |
| सीत्कारं | सीत्कार (२.१) | hissing sound/sound of pain |
| च | च | and |
| न | न | not |
| संमुखौ | संमुख (१.२) | facing |
| रचयतः | रचयतः (√रच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | make |
| कम्पं | कम्प (२.१) | trembling |
| च | च | and |
| न | न | not |
| प्राप्नुतः | प्राप्नुतः (प्र√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | attain |
| तत् | तद् | that |
| युक्तं | युक्त (√युज्+क्त, १.१) | is proper |
| न | न | not |
| पुनः | पुनर् | but |
| निवृत्तिः | निवृत्ति (१.१) | return |
| उभयोः | उभ (६.२) | of both |
| जागर्ति | जागर्ति (√जागृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | exists |
| यत् | यद् | that |
| मुक्तयोः | मुक्त (√मुच्+क्त, ६.२) | of the released |
| एकः | एक (१.१) | one |
| तत्र | तत्र | there |
| भिनत्ति | भिनत्ति (√भिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pierces |
| मित्रम् | मित्र (२.१) | friend / the sun |
| अपरः | अपर (१.१) | the other |
| च | च | and |
| अमित्रम् | अमित्र (२.१) | enemy |
| इति | इति | this |
| अद्भुतम् | अद्भुत (१.१) | is a wonder |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्या | रि | प्र | क | रः | श | र | श्च | नृ | प | तेः | सं | ख्ये | प | त | न्ता | वु | भौ |
| सी | त्का | रं | च | न | सं | मु | खौ | र | च | य | तः | क | म्पं | च | न | प्रा | प्नु | तः |
| त | द्यु | क्तं | न | पु | न | र्नि | वृ | त्ति | रु | भ | यो | र्जा | ग | र्ति | य | न्मु | क्त | यो |
| रे | क | स्त | त्र | भि | न | त्ति | मि | त्र | म | प | र | श्चा | मि | त्र | मि | त्य | द्भु | तम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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