यः पृष्ठं युधि दर्शयत्यरिभटश्रेणीषु यो वक्रता-
मस्मिन्नेव बिभर्ति यञ्च किरति कूरध्वनिं निष्ठुरः ।
दोषं तस्य तथाविधस्य भजतश्चापस्य गृह्णन्गुणं
विख्यातः स्फुटमेक एष नृपतिः सीमा गुणग्राहिणाम् ॥
यः पृष्ठं युधि दर्शयत्यरिभटश्रेणीषु यो वक्रता-
मस्मिन्नेव बिभर्ति यञ्च किरति कूरध्वनिं निष्ठुरः ।
दोषं तस्य तथाविधस्य भजतश्चापस्य गृह्णन्गुणं
विख्यातः स्फुटमेक एष नृपतिः सीमा गुणग्राहिणाम् ॥
मस्मिन्नेव बिभर्ति यञ्च किरति कूरध्वनिं निष्ठुरः ।
दोषं तस्य तथाविधस्य भजतश्चापस्य गृह्णन्गुणं
विख्यातः स्फुटमेक एष नृपतिः सीमा गुणग्राहिणाम् ॥
अन्वयः
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यः (चापः) युधि अरि-भट-श्रेणीषु पृष्ठम् दर्शयति, यः अस्मिन् एव वक्रताम् बिभर्ति, यत् च निष्ठुरः कूर-ध्वनिम् किरति, तथाविधस्य दोषम् भजतः तस्य चापस्य गुणम् गृह्णन् एषः एकः नृपतिः स्फुटम् गुण-ग्राहिणाम् सीमा (इति) विख्यातः ।
Summary
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The bow shows its back to the enemy, is crooked only towards this king, and emits a harsh sound. This king, taking only the 'guṇa' (virtue/bowstring) of such a faulty bow while ignoring its 'doṣa' (faults), is clearly famous as the pinnacle of those who appreciate virtue.
पदच्छेदः
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| यः | यद् (१.१) | which |
| पृष्ठं | पृष्ठ (२.१) | back |
| युधि | युध् (७.१) | in battle |
| दर्शयति | दर्शयति (√दृश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shows |
| अरिभटश्रेणीषु | अरि–भट–श्रेणी (७.३) | to the ranks of enemy soldiers |
| यः | यद् (१.१) | which |
| वक्रताम् | वक्रता (२.१) | crookedness |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | on this |
| एव | एव | only |
| बिभर्ति | बिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bears |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| च | च | and |
| किरति | किरति (√कॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | emits |
| कूरध्वनिं | कूर–ध्वनि (२.१) | a cruel sound |
| निष्ठुरः | निष्ठुर (१.१) | harsh |
| दोषं | दोष (२.१) | fault |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| तथाविधस्य | तथाविध (६.१) | of such a kind |
| भजतः | भजत् (√भज्+शतृ, ६.१) | possessing |
| चापस्य | चाप (६.१) | of the bow |
| गृह्णन् | गृह्णन् (√ग्रह्+शतृ, १.१) | taking |
| गुणं | गुण (२.१) | virtue / bowstring |
| विख्यातः | विख्यात (वि√ख्या+क्त, १.१) | is famous |
| स्फुटम् | स्फुटम् | clearly |
| एकः | एक (१.१) | one, alone |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| नृपतिः | नृपति (१.१) | king |
| सीमा | सीमन् (१.१) | pinnacle |
| गुणग्राहिणाम् | गुणग्राहिन् (६.३) | of those who appreciate virtues |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | पृ | ष्ठं | यु | धि | द | र्श | य | त्य | रि | भ | ट | श्रे | णी | षु | यो | व | क्र | ता |
| म | स्मि | न्ने | व | बि | भ | र्ति | य | ञ्च | कि | र | ति | कू | र | ध्व | निं | नि | ष्ठु | रः |
| दो | षं | त | स्य | त | था | वि | ध | स्य | भ | ज | त | श्चा | प | स्य | गृ | ह्ण | न्गु | णं |
| वि | ख्या | तः | स्फु | ट | मे | क | ए | ष | नृ | प | तिः | सी | मा | गु | ण | ग्रा | हि | णाम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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