आस्ते दामदोरीयामियमुदरदरीं यावलम्ब्य त्रिलोकी
संमातुं शक्नुवन्ति प्रथिमभरवशादत्र नैतद्यशांसि ।
तामेनां पूरयित्वा निरगुरिव मधुध्वंसिनः पाण्डुपद्म-
च्छद्मापन्नानितानिद्विपदशनसनाभीनि नाभीपथेन ॥
आस्ते दामदोरीयामियमुदरदरीं यावलम्ब्य त्रिलोकी
संमातुं शक्नुवन्ति प्रथिमभरवशादत्र नैतद्यशांसि ।
तामेनां पूरयित्वा निरगुरिव मधुध्वंसिनः पाण्डुपद्म-
च्छद्मापन्नानितानिद्विपदशनसनाभीनि नाभीपथेन ॥
संमातुं शक्नुवन्ति प्रथिमभरवशादत्र नैतद्यशांसि ।
तामेनां पूरयित्वा निरगुरिव मधुध्वंसिनः पाण्डुपद्म-
च्छद्मापन्नानितानिद्विपदशनसनाभीनि नाभीपथेन ॥
अन्वयः
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इयम् त्रिलोकी यावत् दाम-दोरीयाम् उदर-दरीम् अवलम्ब्य आस्ते, (तावत्) प्रथिम-भर-वशात् एतत्-यशांसि अत्र सम्मातुम् न शक्नुवन्ति । (अतः) तानि द्विप-दशन-सनाभीनि (यशांसि) मधु-ध्वंसिनः पाण्डु-पद्म-छद्म-आपन्नानि (इव) ताम् एनाम् (उदर-दरीम्) पूरयित्वा नाभी-पथेन निरगुः इव ।
Summary
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The three worlds exist within the cave of Vishnu's belly. Due to their vastness, this king's glories, resembling elephant tusks, cannot be contained there. So, after filling that belly-cave, they seem to exit through the navel path, disguised as the white lotus that springs from Vishnu's navel.
पदच्छेदः
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| आस्ते | आस्ते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | exists |
| दामदोरीयाम् | दामदोरीय (२.१) | like a small rope |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| उदरदरीं | उदरदरी (२.१) | the cave of the belly |
| यावत् | यावत् | which |
| अवलम्ब्य | अवलम्ब्य (अव√लम्ब्+ल्यप्) | having resorted to |
| त्रिलोकी | त्रिलोकी (१.१) | the three worlds |
| संमातुं | संमातुम् (सम्√मा+तुमुन्) | to be contained |
| शक्नुवन्ति | शक्नुवन्ति (√शक् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are able |
| प्रथिमभरवशात् | प्रथिमन्–भर–वशात् (५.१) | due to the abundance of their expanse |
| अत्र | अत्र | here |
| न | न | not |
| एतद्यशांसि | एतद्–यशस् (१.३) | his fames |
| तामेनां | तद् (२.१)–एनद् (२.१) | that this |
| पूरयित्वा | पूरयित्वा (√पॄ+णिच्+क्त्वा) | having filled |
| निरगुरिव | निरगुः (निर्√गम् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.)–इव | went out, as if |
| मधुध्वंसिनः | मधुध्वंसिन् (६.१) | of Vishnu |
| पाण्डुपद्मच्छद्मापन्नानि | पाण्डु–पद्म–छद्मन्–आपन्न (√आ+क्त, १.३) | which have assumed the disguise of a white lotus |
| तानि | तद् (१.३) | those |
| द्विपदशनसनाभीनि | द्विप–दशन–सनाभि (१.३) | resembling elephant tusks |
| नाभीपथेन | नाभी–पथ (३.१) | through the path of the navel |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | स्ते | दा | म | दो | री | या | मि | य | मु | द | र | द | रीं | या | व | ल | म्ब्य | त्रि | लो | की |
| सं | मा | तुं | श | क्नु | व | न्ति | प्र | थि | म | भ | र | व | शा | द | त्र | नै | त | द्य | शां | सि |
| ता | मे | नां | पू | र | यि | त्वा | नि | र | गु | रि | व | म | धु | ध्वं | सि | नः | पा | ण्डु | प | द्म |
| च्छ | द्मा | प | न्ना | नि | ता | नि | द्वि | प | द | श | न | स | ना | भी | नि | ना | भी | प | थे | न |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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