यद्भर्तुः कुरुतेऽभिषेणनमयं शक्रो भुवः सा ध्रुवं
दैग्दाहैरिव भस्मभिर्मघवता वृष्टैर्धृतोद्धूलना ।
शंभोर्मा बत सांधिवेलनटनं भाजि व्रतं द्रागिति
क्षोणी नृत्यति मूर्तिरष्टवपुषोऽसृग्वृष्टिसंध्याधिया ॥
यद्भर्तुः कुरुतेऽभिषेणनमयं शक्रो भुवः सा ध्रुवं
दैग्दाहैरिव भस्मभिर्मघवता वृष्टैर्धृतोद्धूलना ।
शंभोर्मा बत सांधिवेलनटनं भाजि व्रतं द्रागिति
क्षोणी नृत्यति मूर्तिरष्टवपुषोऽसृग्वृष्टिसंध्याधिया ॥
दैग्दाहैरिव भस्मभिर्मघवता वृष्टैर्धृतोद्धूलना ।
शंभोर्मा बत सांधिवेलनटनं भाजि व्रतं द्रागिति
क्षोणी नृत्यति मूर्तिरष्टवपुषोऽसृग्वृष्टिसंध्याधिया ॥
अन्वयः
AI
अयं शक्रः यत् भर्तुः भुवः अभिषेणनम् कुरुते, सा (क्षोणी) ध्रुवम् मघवता वृष्टैः दैग्दाहैः इव भस्मभिः धृत-उद्धूलना (सती), 'शंभोः सांधिवेल-नटनम् व्रतम् द्राक् मा भाजि' इति बत असृक्-वृष्टि-संध्या-धिया अष्टवपुषः मूर्तिः (इव) नृत्यति ।
Summary
AI
When this Indra (Nala) attacks her husband (the enemy king), the Earth, smeared with ashes like those from the fires of the quarters rained down by Indra, dances. She dances like a form of the eight-formed Shiva, thinking the rain of blood is the evening twilight, as if to say, 'Alas, let not Shiva's vow of evening dance be quickly broken.'
पदच्छेदः
AI
| यत् | यद् | that which |
| भर्तुः | भर्तृ (६.१) | of the husband |
| कुरुते | कुरुते (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | does |
| अभिषेणनम् | अभिषेणन (२.१) | attack |
| अयं | इदम् (१.१) | this |
| शक्रः | शक्र (१.१) | Indra (Nala) |
| भुवः | भू (६.१) | of the earth |
| सा | तद् (१.१) | she |
| ध्रुवम् | ध्रुवम् | certainly |
| दैग्दाहैः | दैग्दाह (३.३) | by the fires of the quarters |
| इव | इव | like |
| भस्मभिः | भस्मन् (३.३) | with ashes |
| मघवता | मघवत् (३.१) | by Indra |
| वृष्टैः | वृष्ट (√वृष्+क्त, ३.३) | rained |
| धृतोद्धूलना | धृत (√धृ+क्त)–उद्धूलना (१.१) | who has smeared herself |
| शंभोः | शम्भु (६.१) | of Shiva |
| मा | मा | not |
| बत | बत | alas |
| सांधिवेलनटनं | सांधिवेल–नटन (२.१) | the evening dance |
| भाजि | भाजि (√भञ्ज् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | may be broken |
| व्रतं | व्रत (२.१) | vow |
| द्राक् | द्राक् | quickly |
| इति | इति | thus |
| क्षोणी | क्षोणी (१.१) | the earth |
| नृत्यति | नृत्यति (√नृत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | dances |
| मूर्तिः | मूर्ति (१.१) | form |
| अष्टवपुषः | अष्टवपुष् (६.१) | of the eight-formed one (Shiva) |
| असृग्वृष्टिसंध्याधिया | असृज्–वृष्टि–संध्या–धी (३.१) | with the thought of the twilight being a rain of blood |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द्भ | र्तुः | कु | रु | ते | ऽभि | षे | ण | न | म | यं | श | क्रो | भु | वः | सा | ध्रु | वं |
| दै | ग्दा | है | रि | व | भ | स्म | भि | र्म | घ | व | ता | वृ | ष्टै | र्धृ | तो | द्धू | ल | ना |
| शं | भो | र्मा | ब | त | सां | धि | वे | ल | न | ट | नं | भा | जि | व्र | तं | द्रा | गि | ति |
| क्षो | णी | नृ | त्य | ति | मू | र्ति | र | ष्ट | व | पु | षो | ऽसृ | ग्वृ | ष्टि | सं | ध्या | धि | या |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.