एतद्यशःक्षीरधिपूरगाहि
पतत्यगाधे वचनं कवीनाम् ।
एतद्गुणानां गणनाङ्कपातः
प्रत्यर्थिकीर्तीः खटिकाः क्षिणोति ॥
एतद्यशःक्षीरधिपूरगाहि
पतत्यगाधे वचनं कवीनाम् ।
एतद्गुणानां गणनाङ्कपातः
प्रत्यर्थिकीर्तीः खटिकाः क्षिणोति ॥
पतत्यगाधे वचनं कवीनाम् ।
एतद्गुणानां गणनाङ्कपातः
प्रत्यर्थिकीर्तीः खटिकाः क्षिणोति ॥
अन्वयः
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कवीनाम् वचनम् अगाधे एतत्-यशः-क्षीरधि-पूरे गाढं पतति । एतत्-गुणानाम् गणना-अङ्क-पातः प्रत्यर्थि-कीर्तीः खटिकाः क्षिणोति ।
Summary
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The speech of poets falls deep, plunging into the fathomless flood of the milk-ocean of this king's fame. The very act of counting his virtues, like a chalk mark being drawn, erases the chalk marks representing the glories of his rivals.
पदच्छेदः
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| एतत् | एतद् | his |
| यशः | यशस् | fame's |
| क्षीरधि | क्षीरधि | milk-ocean's |
| पूर | पूर | flood |
| गाहि | गाहिन् (१.१) | plunging into |
| पतति | पतति (√पत् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | falls |
| अगाधे | अगाध (७.१) | in the fathomless |
| वचनम् | वचन (१.१) | the speech |
| कवीनाम् | कवि (६.३) | of poets |
| एतत् | एतद् | his |
| गुणानाम् | गुण (६.३) | of virtues |
| गणना | गणना | counting |
| अङ्क | अङ्क | number's |
| पातः | पात (१.१) | the stroke |
| प्रत्यर्थि | प्रत्यर्थिन् | rivals' |
| कीर्तीः | कीर्ति (२.३) | glories |
| खटिकाः | खटिका (२.३) | the chalk marks |
| क्षिणोति | क्षिणोति (√क्षि कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | erases |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | द्य | शः | क्षी | र | धि | पू | र | गा | हि |
| प | त | त्य | गा | धे | व | च | नं | क | वी | नाम् |
| ए | त | द्गु | णा | नां | ग | ण | ना | ङ्क | पा | तः |
| प्र | त्य | र्थि | की | र्तीः | ख | टि | काः | क्षि | णो | ति |
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