इदंयशांसि द्विषतः सुधारुचः
किमङ्कमेतद्द्विषातः किमाननम् ।
यशोभिरस्याखिललोकधाविभि-
र्विभीषिता धावति तामसी मसी ॥
इदंयशांसि द्विषतः सुधारुचः
किमङ्कमेतद्द्विषातः किमाननम् ।
यशोभिरस्याखिललोकधाविभि-
र्विभीषिता धावति तामसी मसी ॥
किमङ्कमेतद्द्विषातः किमाननम् ।
यशोभिरस्याखिललोकधाविभि-
र्विभीषिता धावति तामसी मसी ॥
अन्वयः
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सुधारुचः द्विषतः इदंयशांसि (सन्ति) । एतद्द्विषातः अङ्कं किम्? आननं किम्? अस्य अखिललोकधाविभिः यशोभिः विभीषिता तामसी मसी धावति ।
Summary
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The fame of this king is hostile to the moon. What is the spot on the moon? What is its face? Terrified by this king's fame, which pervades all worlds, the dark blemish on the moon is fleeing. This offers a poetic explanation for the moon's dark spot.
पदच्छेदः
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| इदंयशांसि | इदंयशस् (१.३) | the fame of this king |
| द्विषतः | द्विषत् (√द्विष्, १.३) | are hostile to |
| सुधारुचः | सुधारुच् (६.१) | of the moon |
| किम् | किम् | what |
| अङ्कम् | अङ्क (१.१) | the spot |
| एतद्द्विषातः | एतद्द्विषत् (६.१) | of the enemy of this king (the moon) |
| किम् | किम् | what |
| आननम् | आनन (१.१) | the face |
| यशोभिः | यशस् (३.३) | by the fame |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this (king) |
| अखिललोकधाविभिः | अखिल–लोक–धाविन् (३.३) | which runs through all the worlds |
| विभीषिता | विभीषित (वि√भी+णिच्+क्त, १.१) | terrified |
| धावति | धावति (√धाव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | runs |
| तामसी | तामसी (१.१) | dark |
| मसी | मसी (१.१) | blemish |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | दं | य | शां | सि | द्वि | ष | तः | सु | धा | रु | चः |
| कि | म | ङ्क | मे | त | द्द्वि | षा | तः | कि | मा | न | नम् |
| य | शो | भि | र | स्या | खि | ल | लो | क | धा | वि | भि |
| र्वि | भी | षि | ता | धा | व | ति | ता | म | सी | म | सी |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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