अथैतदुर्वीपतिवर्णनाद्भुतं
न्यमीलदास्वादयितुं हृदीव सा ।
मधुस्रजा नैषधनामजापिनी
स्फुटीभवद्ध्यानपुरःस्फुरन्नला ॥
अथैतदुर्वीपतिवर्णनाद्भुतं
न्यमीलदास्वादयितुं हृदीव सा ।
मधुस्रजा नैषधनामजापिनी
स्फुटीभवद्ध्यानपुरःस्फुरन्नला ॥
न्यमीलदास्वादयितुं हृदीव सा ।
मधुस्रजा नैषधनामजापिनी
स्फुटीभवद्ध्यानपुरःस्फुरन्नला ॥
अन्वयः
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अथ सा एतदुर्वीपतिवर्णनाद्भुतं हृदि आस्वादयितुम् इव न्यमीलत् । (सा कीदृशी?) मधुस्रजा नैषधनामजापिनी, स्फुटीभवद्ध्यानपुरःस्फुरन्नला (आसीत्) ।
Summary
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Then, Damayanti closed her eyes as if to savor the wonder of this king's description in her heart. With her flower garland, she began chanting the name "Naishadha," and Nala, becoming clear in her meditation, appeared before her mind's eye.
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| एतदुर्वीपतिवर्णनाद्भुतम् | एतत्–उर्वीपति–वर्णना–अद्भुत (२.१) | the wonder of this king's description |
| न्यमीलत् | न्यमीलत् (नि√मील् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she closed her eyes |
| आस्वादयितुम् | आस्वादयितुम् (आ√स्वद्+णिच्+तुमुन्) | to savor |
| हृदि | हृद् (७.१) | in her heart |
| इव | इव | as if |
| सा | तद् (१.१) | she (Damayanti) |
| मधुस्रजा | मधुस्रज् (३.१) | with a garland of flowers |
| नैषधनामजापिनी | नैषध–नाम–जापिनी (१.१) | chanting the name of the king of Nishadha |
| स्फुटीभवद्ध्यानपुरःस्फुरन्नला | स्फुटीभवत्–ध्यान–पुरस्–स्फुरत्–नला (१.१) | in whose clear meditation Nala appeared before her |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थै | त | दु | र्वी | प | ति | व | र्ण | ना | द्भु | तं |
| न्य | मी | ल | दा | स्वा | द | यि | तुं | हृ | दी | व | सा |
| म | धु | स्र | जा | नै | ष | ध | ना | म | जा | पि | नी |
| स्फु | टी | भ | व | द्ध्या | न | पु | रः | स्फु | र | न्न | ला |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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