दूरं गौरगुणैरहंकृतिभृतां जैत्राङ्ककारे चर-
त्येतद्दोर्यशसि प्रयाति कुमुदं बिभ्यन्न निद्रां निशि ।
धम्मिल्ले तव मल्लिकासुमनसां माल्यं भिया लीयते
पीयूषस्रवकैतवाद्धृतदरः शीतद्युतिः स्विद्यति ॥
दूरं गौरगुणैरहंकृतिभृतां जैत्राङ्ककारे चर-
त्येतद्दोर्यशसि प्रयाति कुमुदं बिभ्यन्न निद्रां निशि ।
धम्मिल्ले तव मल्लिकासुमनसां माल्यं भिया लीयते
पीयूषस्रवकैतवाद्धृतदरः शीतद्युतिः स्विद्यति ॥
त्येतद्दोर्यशसि प्रयाति कुमुदं बिभ्यन्न निद्रां निशि ।
धम्मिल्ले तव मल्लिकासुमनसां माल्यं भिया लीयते
पीयूषस्रवकैतवाद्धृतदरः शीतद्युतिः स्विद्यति ॥
अन्वयः
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गौरगुणैः अहंकृतिभृतां जैत्राङ्ककारे एतद्दोर्यशसि दूरं चरति (सति), कुमुदं बिभ्यत् निशि निद्रां न प्रयाति । तव धम्मिल्ले मल्लिकासुमनसां माल्यं भिया लीयते । शीतद्युतिः धृतदरः (सन्) पीयूषस्रवकैतवात् स्विद्यति ।
Summary
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As the white fame of this king's arms, which marks his victory over the proud, spreads far, the night-lotus, fearing it, does not close (sleep) at night. The jasmine garland in your hair hides out of fear. The moon, seized with fear, sweats under the pretext of dripping nectar.
पदच्छेदः
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| दूरम् | दूरम् | far |
| गौरगुणैः | गौरगुण (३.३) | with its white qualities |
| अहंकृतिभृताम् | अहंकृतिभृत् (६.३) | of those who bear pride |
| जैत्राङ्ककारे | जैत्राङ्ककार (७.१) | in the act of making a victory mark |
| चरति | चरत् (√चर्, ७.१) | while spreading |
| एतद्दोर्यशसि | एतत्–दोस्–यशस् (७.१) | in the fame of this king's arms |
| प्रयाति | प्रयाति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes to |
| कुमुदम् | कुमुद (१.१) | the night-lotus |
| बिभ्यत् | बिभ्यत् (√भी, १.१) | fearing |
| न | न | not |
| निद्राम् | निद्रा (२.१) | sleep |
| निशि | निशा (७.१) | at night |
| धम्मिल्ले | धम्मिल्ल (७.१) | in the braided hair |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| मल्लिकासुमनसाम् | मल्लिकासुमनस् (६.३) | of jasmine flowers |
| माल्यम् | माल्य (१.१) | garland |
| भिया | भी (३.१) | with fear |
| लीयते | लीयते (√ली कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | hides |
| पीयूषस्रवकैतवात् | पीयूष–स्रव–कैतव (५.१) | under the pretext of dripping nectar |
| धृतदरः | धृत–दर (१.१) | holding fear |
| शीतद्युतिः | शीतद्युति (१.१) | the moon |
| स्विद्यति | स्विद्यति (√स्विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sweats |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दू | रं | गौ | र | गु | णै | र | हं | कृ | ति | भृ | तां | जै | त्रा | ङ्क | का | रे | च | र |
| त्ये | त | द्दो | र्य | श | सि | प्र | या | ति | कु | मु | दं | बि | भ्य | न्न | नि | द्रां | नि | शि |
| ध | म्मि | ल्ले | त | व | म | ल्लि | का | सु | म | न | सां | मा | ल्यं | भि | या | ली | य | ते |
| पी | यू | ष | स्र | व | कै | त | वा | द्धृ | त | द | रः | शी | त | द्यु | तिः | स्वि | द्य | ति |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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