अमुष्योर्वीभर्तुः प्रसृमरचमूसिन्धुरभवै-
रवैमि प्रारब्धे वमथुभिरवश्यायसमये
न कम्पन्तामन्तः प्रतिनृपभटा म्लायतु न
तद्वधूवक्त्राम्भोजं भवतु न स तेषां कुदिवस्-
अः
अमुष्योर्वीभर्तुः प्रसृमरचमूसिन्धुरभवै-
रवैमि प्रारब्धे वमथुभिरवश्यायसमये
न कम्पन्तामन्तः प्रतिनृपभटा म्लायतु न
तद्वधूवक्त्राम्भोजं भवतु न स तेषां कुदिवस्-
अः
रवैमि प्रारब्धे वमथुभिरवश्यायसमये
न कम्पन्तामन्तः प्रतिनृपभटा म्लायतु न
तद्वधूवक्त्राम्भोजं भवतु न स तेषां कुदिवस्-
अः
अन्वयः
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अमुष्य उर्वीभर्तुः प्रसृमरचमूसिन्धुरभवैः वमथुभिः अवश्यायसमये प्रारब्धे (सति), अवैमि, प्रतिनृपभटाः अन्तः न कम्पन्ताम्, तद्वधूवक्त्राम्भोजं न म्लायतु, सः तेषां कुदिवसः न भवतु ।
Summary
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I think that when the season of frost begins with the spray of ichor from the elephants of this king's advancing army, the soldiers of enemy kings should not tremble within, the lotus-faces of their wives should not wither, and it should not be a bad day for them. (This is a sarcastic prayer, implying all these bad things will indeed happen).
पदच्छेदः
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| अमुष्य | अदस् (६.१) | of this |
| उर्वीभर्तुः | उर्वीभर्तृ (६.१) | of the king (husband of the earth) |
| प्रसृमरचमूसिन्धुरभवैः | प्रसृमर–चमू–सिन्धुर–भव (३.३) | by what is produced from the elephants of his spreading army |
| अवैमि | अवैमि (अव√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I think |
| प्रारब्धे | प्रारब्ध (प्र+आ√रभ्+क्त, ७.१) | having been started |
| वमथुभिः | वमथु (३.३) | by the spray/ichor |
| अवश्यायसमये | अवश्यायसमय (७.१) | at the time of frost |
| न | न | not |
| कम्पन्ताम् | कम्पन्ताम् (√कम्प् कर्तरि लोट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | let them tremble |
| अन्तः | अन्तर् | inside |
| प्रतिनृपभटाः | प्रतिनृपभट (१.३) | the soldiers of enemy kings |
| म्लायतु | म्लायतु (√म्लै कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it wither |
| न | न | not |
| तद्वधूवक्त्राम्भोजम् | तद्–वधू–वक्त्र–अम्भोज (१.१) | the lotus-face of their wives |
| भवतु | भवतु (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| न | न | not |
| सः | तद् (१.१) | that |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| कुदिवसः | कुदिवस (१.१) | a bad day |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | मु | ष्यो | र्वी | भ | र्तुः | प्र | सृ | म | र | च | मू | सि | न्धु | र | भ | वै |
| र | वै | मि | प्रा | र | ब्धे | व | म | थु | भि | र | व | श्या | य | स | म | ये |
| न | क | म्प | न्ता | म | न्तः | प्र | ति | नृ | प | भ | टा | म्ला | य | तु | न | त |
| द्व | धू | व | क्त्रा | म्भो | जं | भ | व | तु | न | स | ते | षां | कु | दि | व | सः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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