नृपः कराभ्यामुदतोलयन्निजे
नृपानयं यान्पततः पदद्वये ।
तदीयचूडाकुरुविन्दरश्मिभिः
स्फुटेयमेतत्करपादरञ्जना ॥
नृपः कराभ्यामुदतोलयन्निजे
नृपानयं यान्पततः पदद्वये ।
तदीयचूडाकुरुविन्दरश्मिभिः
स्फुटेयमेतत्करपादरञ्जना ॥
नृपानयं यान्पततः पदद्वये ।
तदीयचूडाकुरुविन्दरश्मिभिः
स्फुटेयमेतत्करपादरञ्जना ॥
अन्वयः
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अयं नृपः यान् नृपान् निजे पदद्वये पततः कराभ्याम् उदतोलयत्, तदीयचूडाकुरुविन्दरश्मिभिः एतत्करपादरञ्जना इयं स्फुटा (भवति) ।
Summary
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When this king lifts up with his hands other kings who are falling at his feet, the reddening of his hands and feet becomes evident. This redness is caused by the rays from the rubies in the crowns of those subordinate kings.
पदच्छेदः
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| नृपः | नृप (१.१) | king |
| कराभ्याम् | कर (३.२) | with his two hands |
| उदतोलयत् | उदतोलयत् (उत्√तुल् +णिच् लङ्) | he lifted up |
| निजे | निज (७.१) | on his own |
| नृपान् | नृप (२.३) | kings |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| यान् | यद् (२.३) | whom |
| पततः | पतत् (√पत्, २.३) | falling |
| पदद्वये | पदद्वय (७.१) | on his pair of feet |
| तदीयचूडाकुरुविन्दरश्मिभिः | तदीय–चूडा–कुरुविन्द–रश्मि (३.३) | by the rays from the rubies in their crowns |
| स्फुटा | स्फुट (१.१) | evident |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| एतत्करपादरञ्जना | एतत्–कर–पाद–रञ्जना (१.१) | the reddening of his hands and feet |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नृ | पः | क | रा | भ्या | मु | द | तो | ल | य | न्नि | जे |
| नृ | पा | न | यं | या | न्प | त | तः | प | द | द्व | ये |
| त | दी | य | चू | डा | कु | रु | वि | न्द | र | श्मि | भिः |
| स्फु | टे | य | मे | त | त्क | र | पा | द | र | ञ्ज | ना |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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