एतद्दत्तासिघातस्रवदसृगसुहृद्वंशसार्द्रेन्धनैत-
द्दोरुद्दामप्रतापज्वलदनलमिलद्भूमधूमभ्रमाय ।
एतद्दिग्जैत्रयात्रासमसमरभरं पश्यतः कस्य नासी-
देतन्नासीरवाजिव्रजखुरजरजोराजिराजिस्थलीषु ॥
एतद्दत्तासिघातस्रवदसृगसुहृद्वंशसार्द्रेन्धनैत-
द्दोरुद्दामप्रतापज्वलदनलमिलद्भूमधूमभ्रमाय ।
एतद्दिग्जैत्रयात्रासमसमरभरं पश्यतः कस्य नासी-
देतन्नासीरवाजिव्रजखुरजरजोराजिराजिस्थलीषु ॥
द्दोरुद्दामप्रतापज्वलदनलमिलद्भूमधूमभ्रमाय ।
एतद्दिग्जैत्रयात्रासमसमरभरं पश्यतः कस्य नासी-
देतन्नासीरवाजिव्रजखुरजरजोराजिराजिस्थलीषु ॥
अन्वयः
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एतत्-दिक्-जैत्र-यात्रा-सम-समर-भरम् पश्यतः कस्य एतत्-नासीर-वाजि-व्रज-खुर-ज-रजः-राजि-राजिस्थलीषु एतत्-दत्त-असि-घात-स्रवत्-असृक्-असुहृत्-वंश-स-आर्द्र-इन्धन-एतत्-दोः-उद्दाम-प्रताप-ज्वलत्-अनल-मिलत्-भूम-धूम-भ्रमाय न आसीत् ।
Summary
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For whom, watching the great battles during this king's world-conquering expedition, did the lines of dust raised by the hooves of his vanguard horses not create the illusion of vast smoke? This smoke seemed to rise from the fire of his fierce arm-prowess, fueled by the bamboo-like bodies of his enemies, which were wet with blood from his sword-strikes.
पदच्छेदः
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| एतद्दत्तासिघातस्रवदसृगसुहृद्वंशसार्द्रेन्धनैतद्दोरुद्दामप्रतापज्वलदनलमिलद्भूमधूमभ्रमाय | एतत्–दत्त–असि–घात–स्रवत्–असृज्–असुहृद्–वंश–स-आर्द्र–इन्धन–एतत्–दोस्–उद्दाम–प्रताप–ज्वलत्–अनल–मिलत्–भूम–धूम–भ्रम (४.१) | for the illusion of vast smoke rising from the fire of his fierce arm-prowess, fueled by the bamboo-like bodies of his enemies, wet with the blood flowing from his sword-strikes |
| एतद्दिग्जैत्रयात्रासमसमरभरम् | एतत्–दिश–जैत्र–यात्रा–सम–समर–भर (२.१) | the burden of battles during this king's world-conquering expedition |
| पश्यतः | पश्यत् (√दृश्, ६.१) | of one who sees |
| कस्य | किम् (६.१) | for whom |
| न | न | not |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| एतन्नासीरवाजिव्रजखुरजरजोराजिराजिस्थलीषु | एतत्–नासीर–वाजि–व्रज–खुर–ज–रजस्–राजि–राजिस्थली (७.३) | in the lines of dust-filled grounds raised by the hooves of the vanguard horses of this king |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | द्द | त्ता | सि | घा | त | स्र | व | द | सृ | ग | सु | हृ | द्वं | श | सा | र्द्रे | न्ध | नै | त |
| द्दो | रु | द्दा | म | प्र | ता | प | ज्व | ल | द | न | ल | मि | ल | द्भू | म | धू | म | भ्र | मा | य |
| ए | त | द्दि | ग्जै | त्र | या | त्रा | स | म | स | म | र | भ | रं | प | श्य | तः | क | स्य | ना | सी |
| दे | त | न्ना | सी | र | वा | जि | व्र | ज | खु | र | ज | र | जो | रा | जि | रा | जि | स्थ | ली | षु |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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