निस्त्रिंशत्रुटितारिवारणघटाकुम्भास्तिकूटावट-
स्थानस्थायुकमौक्तिकोत्करकिरः कैरस्य नायं करः ।
उन्नीतश्चतुरङ्गसैन्यसमरत्वङ्गत्तुरंगक्षुर-
क्षुण्णासु क्षितिषु क्षिपन्निव यशः क्षोणीजबीजव्रजम् ॥
निस्त्रिंशत्रुटितारिवारणघटाकुम्भास्तिकूटावट-
स्थानस्थायुकमौक्तिकोत्करकिरः कैरस्य नायं करः ।
उन्नीतश्चतुरङ्गसैन्यसमरत्वङ्गत्तुरंगक्षुर-
क्षुण्णासु क्षितिषु क्षिपन्निव यशः क्षोणीजबीजव्रजम् ॥
स्थानस्थायुकमौक्तिकोत्करकिरः कैरस्य नायं करः ।
उन्नीतश्चतुरङ्गसैन्यसमरत्वङ्गत्तुरंगक्षुर-
क्षुण्णासु क्षितिषु क्षिपन्निव यशः क्षोणीजबीजव्रजम् ॥
अन्वयः
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निस्त्रिंशत्रुटितारिवारणघटाकुम्भास्तिकूटावटस्थानस्थायुकमौक्तिकोत्करकिरः अयम् अस्य करः कैः न उन्नीतः? (सः) चतुरङ्गसैन्यसमरत्वङ्गत्तुरंगक्षुरक्षुण्णासु क्षितिषु यशःक्षोणीजबीजव्रजं क्षिपन् इव (अस्ति) ।
Summary
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By whom is this king's hand (or tax) not praised? It scatters heaps of pearls from the skulls of enemy elephants slain by his sword. It is as if he is sowing seeds of fame-plants on the earth, trampled by the hooves of leaping horses in the battles of his four-limbed army.
पदच्छेदः
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| निस्त्रिंशत्रुटितारिवारणघटाकुम्भास्तिकूटावटस्थानस्थायुकमौक्तिकोत्करकिरः | निस्त्रिंश–त्रुटित–अरि–वारण–घटा–कुम्भ–अस्थि–कूट–अवट–स्थान–स्थायुक–मौक्तिक–उत्कर–किर (१.१) | which scatters heaps of pearls staying in the pits of the heaps of bones from the frontal globes of the troops of enemy elephants broken by his sword |
| कैः | किम् (३.३) | by whom |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| न | न | not |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| करः | कर (१.१) | hand/tax |
| उन्नीतः | उन्नीत (उत्√नी+क्त, १.१) | praised |
| च | च | and |
| चतुरङ्गसैन्यसमरत्वङ्गत्तुरंगक्षुरक्षुण्णासु | चतुरङ्ग–सैन्य–समर–त्वङ्गत्–तुरङ्ग–क्षुर–क्षुण्ण (७.३) | on the lands trampled by the hooves of leaping horses in the battles of his four-limbed army |
| क्षितिषु | क्षिति (७.३) | on the lands |
| क्षिपन् | क्षिपत् (√क्षिप्+शतृ, १.१) | scattering |
| इव | इव | as if |
| यशःक्षोणीजबीजव्रजम् | यशस्–क्षोणीज–बीज–व्रज (२.१) | a collection of seeds of fame-plants |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | स्त्रिं | श | त्रु | टि | ता | रि | वा | र | ण | घ | टा | कु | म्भा | स्ति | कू | टा | व | ट |
| स्था | न | स्था | यु | क | मौ | क्ति | को | त्क | र | कि | रः | कै | र | स्य | ना | यं | क | रः |
| उ | न्नी | त | श्च | तु | र | ङ्ग | सै | न्य | स | म | र | त्व | ङ्ग | त्तु | रं | ग | क्षु | र |
| क्षु | ण्णा | सु | क्षि | ति | षु | क्षि | प | न्नि | व | य | शः | क्षो | णी | ज | बी | ज | व्र | जम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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