धराधिराजं निजगाद भारती
तदुन्मुखेषद्वलिताङ्गसूचितम् ।
दमस्वसारं प्रति सारवत्तरं
कुलेन शीलेन च राजसूचितम् ॥
धराधिराजं निजगाद भारती
तदुन्मुखेषद्वलिताङ्गसूचितम् ।
दमस्वसारं प्रति सारवत्तरं
कुलेन शीलेन च राजसूचितम् ॥
तदुन्मुखेषद्वलिताङ्गसूचितम् ।
दमस्वसारं प्रति सारवत्तरं
कुलेन शीलेन च राजसूचितम् ॥
अन्वयः
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भारती दमस्वसारं प्रति तदुन्मुखेषद्वलिताङ्गसूचितं, कुलेन शीलेन च सारवत्तरं, राजसूचितं धराधिराजं निजगाद।
Summary
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Saraswati then spoke about another emperor, who was indicated by the slight turning of Damayanti's body towards him, and who was more excellent in lineage and character, as hinted by the previous king's reaction.
पदच्छेदः
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| धराधिराजम् | धरा–अधिराज (२.१) | about the emperor |
| निजगाद | निजगाद (नि√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| भारती | भारती (१.१) | Saraswati |
| तदुन्मुखेषद्वलिताङ्गसूचितम् | तत्–उन्मुख–ईषत्–वलित–अङ्ग–सूचित (२.१) | who was indicated by the slight turning of her (Damayanti's) body towards him |
| दमस्वसारम् | दम–स्वसृ (२.१) | to Damayanti |
| प्रति | प्रति | towards |
| सारवत्तरम् | सारवत्तर (२.१) | more excellent |
| कुलेन | कुल (३.१) | by lineage |
| शीलेन | शील (३.१) | by character |
| च | च | and |
| राजसूचितम् | राज–सूचित (२.१) | indicated by the king |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | रा | धि | रा | जं | नि | ज | गा | द | भा | र | ती |
| त | दु | न्मु | खे | ष | द्व | लि | ता | ङ्ग | सू | चि | तम् |
| द | म | स्व | सा | रं | प्र | ति | सा | र | व | त्त | रं |
| कु | ले | न | शी | ले | न | च | रा | ज | सू | चि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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