कृतात्र देवी वचनाधिकारिणी
त्वमुत्तरंदासि ददासि कासती ।
इतीरिणस्तन्नृपपारिपार्श्विका-
न्स्वभर्तुरेव भ्रुकुटिर्न्यवर्तयत् ॥
कृतात्र देवी वचनाधिकारिणी
त्वमुत्तरंदासि ददासि कासती ।
इतीरिणस्तन्नृपपारिपार्श्विका-
न्स्वभर्तुरेव भ्रुकुटिर्न्यवर्तयत् ॥
त्वमुत्तरंदासि ददासि कासती ।
इतीरिणस्तन्नृपपारिपार्श्विका-
न्स्वभर्तुरेव भ्रुकुटिर्न्यवर्तयत् ॥
अन्वयः
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"अत्र देवी वचनाधिकारिणी कृता। त्वं का असती? उत्तरं दासि (किम्)? (उत्तरं) ददासि (किम्)?" इति ईरिणः तन्नृपपारिपार्श्विकान् स्वभर्तुः भ्रुकुटिः एव न्यवर्तयत्।
Summary
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The attendants of that king started to say, "The goddess is authorized to speak here. Who are you, an unchaste woman, to give or withhold an answer?" But their own master's frown alone silenced them.
पदच्छेदः
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| कृता | कृता (√कृ+क्त, १.१) | is made |
| अत्र | अत्र | here |
| देवी | देवी (१.१) | the goddess |
| वचनाधिकारिणी | वचनाधिकारिणी (१.१) | authorized to speak |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| उत्तरम् | उत्तर (२.१) | an answer |
| दासि | दासि (√दा कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will you give |
| ददासि | ददासि (√दा कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you give |
| का | किम् (१.१) | who |
| असती | असती (१.१) | an unchaste woman |
| इति | इति | thus |
| ईरिणः | ईरिन् (२.३) | those who were speaking |
| तन्नृपपारिपार्श्विकान् | तत्–नृप–पारिपार्श्विक (२.३) | the attendants of that king |
| स्वभर्तुः | स्वभर्तृ (६.१) | of their own master |
| एव | एव | alone |
| भ्रुकुटिः | भ्रुकुटि (१.१) | a frown |
| न्यवर्तयत् | न्यवर्तयत् (नि√वृत् +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | turned back |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | ता | त्र | दे | वी | व | च | ना | धि | का | रि | णी |
| त्व | मु | त्त | रं | दा | सि | द | दा | सि | का | स | ती |
| इ | ती | रि | ण | स्त | न्नृ | प | पा | रि | पा | र्श्वि | का |
| न्स्व | भ | र्तु | रे | व | भ्रु | कु | टि | र्न्य | व | र्त | यत् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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