अनेन राज्ञार्थिषु दुर्भगीकृतो
भवन्घनध्वानजरत्नमेदुरः ।
तथा विदूराद्रिरदूरतां गमी
यथा स गामी तव केलिशैलताम् ॥
अनेन राज्ञार्थिषु दुर्भगीकृतो
भवन्घनध्वानजरत्नमेदुरः ।
तथा विदूराद्रिरदूरतां गमी
यथा स गामी तव केलिशैलताम् ॥
भवन्घनध्वानजरत्नमेदुरः ।
तथा विदूराद्रिरदूरतां गमी
यथा स गामी तव केलिशैलताम् ॥
अन्वयः
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अनेन राज्ञा अर्थिषु दुर्भगीकृतः भवन् घनध्वानजरत्नमेदुरः विदूराद्रिः तथा अदूरतां गमी (भविष्यति), यथा सः तव केलिशैलतां गामी (भविष्यति) ।
Summary
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By this king, the Vidura mountain, rich with gems born from the thunder of clouds, being made unfortunate in regard to supplicants (as the king gives away more), will come so near to you that it will become your pleasure-hill.
पदच्छेदः
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| अनेन | इदम् (३.१) | By this |
| राज्ञा | राजन् (३.१) | king |
| अर्थिषु | अर्थिन् (७.३) | in regard to supplicants |
| दुर्भगीकृतः | दुर्भगीकृत (√कृ+च्वि+क्त, १.१) | made unfortunate |
| भवन् | भवत् (√भू+शतृ, १.१) | being |
| घनध्वानजरत्नमेदुरः | घन–ध्वान–ज–रत्न–मेदुर (१.१) | rich with gems born from the thunder of clouds |
| तथा | तथा | so |
| विदूराद्रिः | विदूराद्रि (१.१) | the Vidura mountain |
| अदूरताम् | अदूरता (२.१) | nearness |
| गमी | गमिन् (१.१) | will attain |
| यथा | यथा | that |
| सः | तद् (१.१) | it |
| गामी | गमिन् (१.१) | will attain |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| केलिशैलताम् | केलि–शैलता (२.१) | the state of being a pleasure-hill |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ने | न | रा | ज्ञा | र्थि | षु | दु | र्भ | गी | कृ | तो |
| भ | व | न्घ | न | ध्वा | न | ज | र | त्न | मे | दु | रः |
| त | था | वि | दू | रा | द्रि | र | दू | र | तां | ग | मी |
| य | था | स | गा | मी | त | व | के | लि | शै | ल | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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