अथान्यमुद्दिश्य नृपं कृपामयी
मुखेन तद्दिङ्मुखसंमुखेन सा ।
दमस्वसारं वदति स्म देवता
गिरामिलाभूवदतिस्मरश्रियम् ॥
अथान्यमुद्दिश्य नृपं कृपामयी
मुखेन तद्दिङ्मुखसंमुखेन सा ।
दमस्वसारं वदति स्म देवता
गिरामिलाभूवदतिस्मरश्रियम् ॥
मुखेन तद्दिङ्मुखसंमुखेन सा ।
दमस्वसारं वदति स्म देवता
गिरामिलाभूवदतिस्मरश्रियम् ॥
अन्वयः
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अथ कृपामयी सा गिराम् देवता तद्दिङ्मुखसंमुखेन मुखेन दमस्वसारम् इलाभूवत् अतिस्मरश्रियम् अन्यं नृपम् उद्दिश्य वदति स्म ।
Summary
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Then, the compassionate goddess of speech, Saraswati, with her face turned towards that king, spoke to Damayanti, pointing out another king who, like the earth, possessed a beauty surpassing that of Kamadeva.
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| अन्यम् | अन्य (२.१) | another |
| उद्दिश्य | उद्दिश्य (उत्√दिश्+ल्यप्) | pointing to |
| नृपम् | नृप (२.१) | king |
| कृपामयी | कृपामयी (१.१) | the compassionate one |
| मुखेन | मुख (३.१) | with her face |
| तद्दिङ्मुखसंमुखेन | तत्–दिक्–मुख–संमुख (३.१) | turned towards the direction of his face |
| सा | तद् (१.१) | she |
| दमस्वसारम् | दम–स्वसृ (२.१) | to Damayanti (Dama's sister) |
| वदति | वदति (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| स्म | स्म | (makes the verb past tense) |
| देवता | देवता (१.१) | the goddess |
| गिराम् | गिर् (६.३) | of speech |
| इलाभूवत् | इलाभूवत् | like the earth |
| अतिस्मरश्रियम् | अति–स्मर–श्री (२.१) | whose beauty surpassed that of Kamadeva |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | न्य | मु | द्दि | श्य | नृ | पं | कृ | पा | म | यी |
| मु | खे | न | त | द्दि | ङ्मु | ख | सं | मु | खे | न | सा |
| द | म | स्व | सा | रं | व | द | ति | स्म | दे | व | ता |
| गि | रा | मि | ला | भू | व | द | ति | स्म | र | श्रि | यम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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