युद्ध्वा चाभिमुखं रणस्य चरणस्यैवादसीयस्य वा
बुद्ध्वाऽन्तः स्वपरान्तरं निपततामुन्मुच्य बाणावलीः ।
छिन्नं वावनतीभवन्निजभियः खिन्नं भरेणाथ वा
राज्ञानेन हठाद्विलोठितमभूद्भूमावरीणां शिरः ॥
युद्ध्वा चाभिमुखं रणस्य चरणस्यैवादसीयस्य वा
बुद्ध्वाऽन्तः स्वपरान्तरं निपततामुन्मुच्य बाणावलीः ।
छिन्नं वावनतीभवन्निजभियः खिन्नं भरेणाथ वा
राज्ञानेन हठाद्विलोठितमभूद्भूमावरीणां शिरः ॥
बुद्ध्वाऽन्तः स्वपरान्तरं निपततामुन्मुच्य बाणावलीः ।
छिन्नं वावनतीभवन्निजभियः खिन्नं भरेणाथ वा
राज्ञानेन हठाद्विलोठितमभूद्भूमावरीणां शिरः ॥
अन्वयः
AI
अनेन राज्ञा रणस्य अभिमुखम् युद्ध्वा, वा अदसीयस्य चरणस्य एव (अभिमुखम्) निपतताम् अरीणाम् अन्तः स्वपरान्तरम् बुद्ध्वा, बाणावलीः उन्मुच्य, छिन्नम् वा, निजभियः अवनतीभवत् वा, अथ वा भरेण खिन्नम् (सत्) शिरः हठात् भूमौ विलोठितम् अभूत्।
Summary
AI
The heads of this king's enemies rolled forcibly on the ground. Whether they were severed by his arrows after fighting him face-to-face, or whether they bowed down at his feet, having understood the difference between their side and his, or whether they bowed from their own fear, or simply drooped from their weight, this king made them roll on the ground.
पदच्छेदः
AI
| युद्ध्वा | युद्ध्वा (√युध्+क्त्वा) | having fought |
| च | च | and |
| अभिमुखम् | अभिमुखम् | face to face |
| रणस्य | रण (६.१) | of battle |
| चरणस्य | चरण (६.१) | of the foot |
| एव | एव | only |
| अदसीयस्य | अदसीय (६.१) | of this one |
| वा | वा | or |
| बुद्ध्वा | बुद्ध्वा (√बुध्+क्त्वा) | having understood |
| अन्तः | अन्तर् | within |
| स्वपरान्तरं | स्व–पर–अन्तर (२.१) | the difference between own and other |
| निपतताम् | निपतत् (नि√पत्+शतृ, ६.३) | of those falling |
| उन्मुच्य | उन्मुच्य (उद्√मुच्+ल्यप्) | having released |
| बाणावलीः | बाण–आवली (२.३) | rows of arrows |
| छिन्नं | छिन्न (√छिद्+क्त, १.१) | severed |
| वा | वा | or |
| अवनतीभवन् | अवनतीभवत् (अवनती√भू+शतृ, १.१) | bowing down |
| निजभियः | निज–भी (५.१) | from its own fear |
| खिन्नं | खिन्न (√खिद्+क्त, १.१) | distressed |
| भरेण | भर (३.१) | by the weight |
| अथ | अथ | or |
| वा | वा | else |
| राज्ञा | राजन् (३.१) | by the king |
| अनेन | इदम् (३.१) | by this |
| हठात् | हठात् | forcibly |
| विलोठितम् | विलोठित (वि√लुठ्+क्त, १.१) | rolled |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| भूमौ | भूमि (७.१) | on the ground |
| अरीणाम् | अरि (६.३) | of the enemies |
| शिरः | शिरस् (१.१) | the head |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यु | द्ध्वा | चा | भि | मु | खं | र | ण | स्य | च | र | ण | स्यै | वा | द | सी | य | स्य | वा |
| बु | द्ध्वा | ऽन्तः | स्व | प | रा | न्त | रं | नि | प | त | ता | मु | न्मु | च्य | बा | णा | व | लीः |
| छि | न्नं | वा | व | न | ती | भ | व | न्नि | ज | भि | यः | खि | न्नं | भ | रे | णा | थ | वा |
| रा | ज्ञा | ने | न | ह | ठा | द्वि | लो | ठि | त | म | भू | द्भू | मा | व | री | णां | शि | रः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.