कृपा नृपाणामुपरि क्वचिन्न ते
नतेन हा हा शिरसा रसादृशाम् ।
भवन्तु तावत्तव लोचनाञ्चला
निपेयनेपालनृपालपालयः ॥
कृपा नृपाणामुपरि क्वचिन्न ते
नतेन हा हा शिरसा रसादृशाम् ।
भवन्तु तावत्तव लोचनाञ्चला
निपेयनेपालनृपालपालयः ॥
नतेन हा हा शिरसा रसादृशाम् ।
भवन्तु तावत्तव लोचनाञ्चला
निपेयनेपालनृपालपालयः ॥
अन्वयः
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हा हा! ते नृपाणाम् उपरि क्वचित् कृपा न (अस्ति)। दृशाम् रसा नतेन शिरसा (किम्)? तावत् तव लोचनाञ्चलाः निपेयनेपालनृपालपालयः भवन्तु।
Summary
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'Alas, you have no pity for these kings! What is the use of the earth (personified) looking on with a bowed head? Let the glances from the corners of your eyes now fall upon the protectors of the king of Nepal, who are worthy of being gazed upon.'
पदच्छेदः
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| कृपा | कृपा (१.१) | Pity |
| नृपाणाम् | नृप (६.३) | for the kings |
| उपरि | उपरि | upon |
| क्वचित् | क्वचित् | anywhere |
| न | न | not |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| नतेन | नत (√नम्+क्त, ३.१) | with bowed |
| हा | हा | alas |
| हा | हा | alas |
| शिरसा | शिरस् (३.१) | head |
| रसा | रसा (१.१) | the earth |
| दृशाम् | दृश् (६.३) | of the eyes |
| भवन्तु | भवन्तु (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them be |
| तावत् | तावत् | then |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| लोचनाञ्चलाः | लोचन–अञ्चल (१.३) | glances from the corner of the eye |
| निपेयनेपालनृपालपालयः | निपेय–नेपाल–नृपाल–पालय (१.३) | the protectors of the king of Nepal, who are to be gazed upon |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | पा | नृ | पा | णा | मु | प | रि | क्व | चि | न्न | ते |
| न | ते | न | हा | हा | शि | र | सा | र | सा | दृ | शाम् |
| भ | व | न्तु | ता | व | त्त | व | लो | च | ना | ञ्च | ला |
| नि | पे | य | ने | पा | ल | नृ | पा | ल | पा | ल | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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