१२.४२

निजाक्षिलक्ष्मीहसितैणशावकामसावभाणीदपरं परंतपम् ।
पुरैव तद्दिग्वलनश्रियां भुवा भ्रुवा विनिर्दिश्य सभासभाजितम् ॥

छन्दः

वंशस्थम् [१२: जतजर]

छन्दोविश्लेषणम्

१०१११२
नि जाक्षि क्ष्मीसि तै शा का
सा भा णी रं रं पम्
पु रै द्दिग्वश्रि यांभु वा
भ्रु वावि नि र्दिश्य भा भाजि तम्