ऋजुत्वमौनश्रुतिपारगामिता
यदीयमेतत्परमेव हिंसितुम् ।
अतीव विश्वासविधायि चेष्टितं
बहुर्महानस्य स दाम्भिकः ॥
ऋजुत्वमौनश्रुतिपारगामिता
यदीयमेतत्परमेव हिंसितुम् ।
अतीव विश्वासविधायि चेष्टितं
बहुर्महानस्य स दाम्भिकः ॥
यदीयमेतत्परमेव हिंसितुम् ।
अतीव विश्वासविधायि चेष्टितं
बहुर्महानस्य स दाम्भिकः ॥
अन्वयः
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यदीयम् एतत् ऋजुत्वम्, मौनम्, श्रुतिपारगामिता (च) परम् एव हिंसितुम् (अस्ति)। अस्य चेष्टितम् अतीव विश्वासविधायि (अस्ति)। सः महान् बहुः दाम्भिकः (अस्ति)।
Summary
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This king's honesty, silence, and mastery of the Vedas are all merely for harming others. His behavior is extremely trust-inspiring, but he is a great and thorough hypocrite. This is a form of sarcastic praise known as 'vyājastuti'.
पदच्छेदः
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| ऋजुत्वमौनश्रुतिपारगामिता | ऋजुत्व–मौन–श्रुति–पारगामिता (१.१) | Honesty, silence, and mastery of the Vedas |
| यदीयम् | यदीय (१.१) | whose |
| एतत् | एतद् (१.१) | this |
| परम् | पर (२.१) | others |
| एव | एव | only |
| हिंसितुम् | हिंसितुम् (√हिंस्+तुमुन्) | to harm |
| अतीव | अतीव | very much |
| विश्वासविधायि | विश्वास–विधायिन् (१.१) | trust-inspiring |
| चेष्टितम् | चेष्टित (१.१) | behavior |
| बहुः | बहु (१.१) | much |
| महान् | महत् (१.१) | great |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| सः | तद् (१.१) | he |
| दाम्भिकः | दाम्भिक (१.१) | is a hypocrite |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋ | जु | त्व | मौ | न | श्रु | ति | पा | र | गा | मि | ता |
| य | दी | य | मे | त | त्प | र | मे | व | हिं | सि | तुम् |
| अ | ती | व | वि | श्वा | स | वि | धा | यि | चे | ष्टि | तं |
| ब | हु | र्म | हा | न | स्य | स | दा | म्भि | कः | ||
| ज | त | ज | र | ||||||||
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