भङ्गाकीर्तिमषीमलीमसतमप्रत्यर्थिसेनाभट-
श्रेणीतिन्दुककाननेषु विलसत्यस्य प्रतापानलः ।
तस्मादुत्पतिताः स्फुरन्ति जगदुत्सङ्गे स्फुलिङ्गाः स्फुटं
भालोद्भूतभवाक्षिभानुहुतभुग्जम्भारिदम्भोलयः ॥
भङ्गाकीर्तिमषीमलीमसतमप्रत्यर्थिसेनाभट-
श्रेणीतिन्दुककाननेषु विलसत्यस्य प्रतापानलः ।
तस्मादुत्पतिताः स्फुरन्ति जगदुत्सङ्गे स्फुलिङ्गाः स्फुटं
भालोद्भूतभवाक्षिभानुहुतभुग्जम्भारिदम्भोलयः ॥
श्रेणीतिन्दुककाननेषु विलसत्यस्य प्रतापानलः ।
तस्मादुत्पतिताः स्फुरन्ति जगदुत्सङ्गे स्फुलिङ्गाः स्फुटं
भालोद्भूतभवाक्षिभानुहुतभुग्जम्भारिदम्भोलयः ॥
अन्वयः
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अस्य प्रताप-अनलः भङ्ग-अकीर्ति-मषी-मलीमसतम-प्रत्यर्थि-सेना-भट-श्रेणी-तिन्दुक-काननेषु विलसति। तस्मात् उत्पतिताः भाल-उद्भूत-भव-अक्षि-भानु-हुतभुक्-जम्भारि-दम्भोलयः स्फुलिङ्गाः जगत्-उत्सङ्गे स्फुटम् स्फुरन्ति।
Summary
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The fire of this king's valor blazes in the Tinduka forests, which are the ranks of enemy soldiers, made exceedingly dark by the ink of infamy from their defeat. The sparks flying from that fire clearly flash in the lap of the world as the fire from Shiva's third eye, the sun, the sacrificial fire, and Indra's thunderbolts.
पदच्छेदः
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| भङ्गाकीर्तिमषीमलीमसतमप्रत्यर्थिसेनाभटश्रेणीतिन्दुककाननेषु | भङ्ग–अकीर्ति–मषी–मलीमसतम–प्रत्यर्थिन्–सेना–भट–श्रेणी–तिन्दुक–कानन (७.३) | in the Tinduka forests of the ranks of enemy soldiers, made most dark by the ink of infamy from defeat |
| विलसति | विलसति (वि√लस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | blazes |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| प्रतापानलः | प्रताप-अनल (१.१) | the fire of valor |
| तस्मात् | तद् (५.१) | from that |
| उत्पतिताः | उत्पतित (उद्√पत्+क्त, १.३) | flown up |
| स्फुरन्ति | स्फुरन्ति (√स्फुर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | flash |
| जगदुत्सङ्गे | जगत्-उत्सङ्ग (७.१) | in the lap of the world |
| स्फुलिङ्गाः | स्फुलिङ्ग (१.३) | sparks |
| स्फुटं | स्फुटम् | clearly |
| भालोद्भूतभवाक्षिभानुहुतभुग्जम्भारिदम्भोलयः | भाल–उद्भूत (उद्√भू+क्त)–भव–अक्षि–भानु–हुतभुज्–जम्भारि–दम्भोलि (१.३) | the fire from Shiva's third eye, the sun, the sacrificial fire, and Indra's thunderbolts |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | ङ्गा | की | र्ति | म | षी | म | ली | म | स | त | म | प्र | त्य | र्थि | से | ना | भ | ट |
| श्रे | णी | ति | न्दु | क | का | न | ने | षु | वि | ल | स | त्य | स्य | प्र | ता | पा | न | लः |
| त | स्मा | दु | त्प | ति | ताः | स्फु | र | न्ति | ज | ग | दु | त्स | ङ्गे | स्फु | लि | ङ्गाः | स्फु | टं |
| भा | लो | द्भू | त | भ | वा | क्षि | भा | नु | हु | त | भु | ग्ज | म्भा | रि | द | म्भो | ल | यः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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