अस्य क्षोणिपतेः पराऋधपरया लक्षीकृताः संख्यया
प्रज्ञाचक्षुरवेक्ष्यमाणतिमिरप्रख्याः किलाकीर्तयः ।
गीयन्ते स्वरमष्टमं कलयता जातेन वन्ध्योदरा-
न्मूकानां प्रकरेण कूर्मरमणीदुग्धोदधे रोधसि ॥
अस्य क्षोणिपतेः पराऋधपरया लक्षीकृताः संख्यया
प्रज्ञाचक्षुरवेक्ष्यमाणतिमिरप्रख्याः किलाकीर्तयः ।
गीयन्ते स्वरमष्टमं कलयता जातेन वन्ध्योदरा-
न्मूकानां प्रकरेण कूर्मरमणीदुग्धोदधे रोधसि ॥
प्रज्ञाचक्षुरवेक्ष्यमाणतिमिरप्रख्याः किलाकीर्तयः ।
गीयन्ते स्वरमष्टमं कलयता जातेन वन्ध्योदरा-
न्मूकानां प्रकरेण कूर्मरमणीदुग्धोदधे रोधसि ॥
अन्वयः
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अस्य क्षोणि-पतेः परार्ध-परया संख्यया लक्षी-कृताः, प्रज्ञा-चक्षुः-अवेक्ष्यमाण-तिमिर-प्रख्याः अकीर्तयः, वन्ध्या-उदरात् जातेन, अष्टमम् स्वरम् कलयता मूकानाम् प्रकरेण कूर्म-रमणी-दुग्ध-उदधेः रोधसि किल गीयन्ते ।
Summary
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'This king's infamies, so they say, are beyond count, resembling the darkness perceived by the blind. They are sung by a choir of mute men, born from a barren woman's womb, producing an eighth musical note on the shores of an ocean of tortoise milk.' (A series of impossibilities, meaning he has no infamies).
पदच्छेदः
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| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| क्षोणिपतेः | क्षोणिपति (६.१) | of the king |
| परार्धपरया | परार्धपरा (३.१) | exceeding a parardha |
| लक्षीकृताः | लक्षीकृत (१.३) | counted |
| संख्यया | संख्या (३.१) | by number |
| प्रज्ञाचक्षुरवेक्ष्यमाणतिमिरप्रख्याः | प्रज्ञाचक्षुस्–अवेक्ष्यमाण–तिमिर–प्रख्य (१.३) | resembling the darkness perceived by a blind person |
| किल | किल | so it is said |
| अकीर्तयः | अकीर्ति (१.३) | infamies |
| गीयन्ते | गीयन्ते (√गै भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are sung |
| स्वरम् | स्वर (२.१) | note |
| अष्टमं | अष्टम (२.१) | eighth |
| कलयता | कलयत् (३.१) | by the one producing |
| जातेन | जात (√जन्+क्त, ३.१) | born |
| वन्ध्योदरात् | वन्ध्या–उदर (५.१) | from the womb of a barren woman |
| मूकानां | मूक (६.३) | of mute people |
| प्रकरेण | प्रकर (३.१) | by a multitude |
| कूर्मरमणीदुग्धोदधेः | कूर्मरमणी–दुग्ध–उदधि (६.१) | of the ocean of milk of a female tortoise |
| रोधसि | रोधस् (७.१) | on the bank |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्य | क्षो | णि | प | तेः | प | रा | ऋ | ध | प | र | या | ल | क्षी | कृ | ताः | सं | ख्य | या |
| प्र | ज्ञा | च | क्षु | र | वे | क्ष्य | मा | ण | ति | मि | र | प्र | ख्याः | कि | ला | की | र्त | यः | |
| गी | य | न्ते | स्व | र | म | ष्ट | मं | क | ल | य | ता | जा | ते | न | व | न्ध्यो | द | रा | |
| न्मू | का | नां | प्र | क | रे | ण | कू | र्म | र | म | णी | दु | ग्धो | द | धे | रो | ध | सि | |
| म | स | ज | स | त | त | ग | |||||||||||||
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