अथावदद्भीमसुतेङ्गितात्सखी
जनैरकीर्तिर्यदि वास्य नेष्यते ।
मयापि सा तत्खलु नेष्यते परं
सभाश्रवःपूरतमालवल्लिताम् ॥
अथावदद्भीमसुतेङ्गितात्सखी
जनैरकीर्तिर्यदि वास्य नेष्यते ।
मयापि सा तत्खलु नेष्यते परं
सभाश्रवःपूरतमालवल्लिताम् ॥
जनैरकीर्तिर्यदि वास्य नेष्यते ।
मयापि सा तत्खलु नेष्यते परं
सभाश्रवःपूरतमालवल्लिताम् ॥
अन्वयः
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अथ भीम-सुता-इङ्गितात् सखी अवदत् - यदि वा जनैः अस्य अकीर्तिः न ईष्यते, तत् खलु मया अपि सा न ईष्यते । परम् सभा-श्रवः-पूर-तमाल-वल्लिताम् (ईष्यते) ।
Summary
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Then, prompted by a gesture from Damayanti, her friend said: 'If people say he has no infamy, then indeed I too say he has none. But his infamy is desired to become like a dark Tamala creeper, filling the ears of this assembly (i.e., she will now speak of his supposed 'infamy').'
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| अवदत् | अवदत् (√वद् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| भीमसुतेङ्गितात् | भीमसुता–इङ्गित (५.१) | from Damayanti's gesture |
| सखी | सखी (१.१) | the female friend |
| जनैः | जन (३.३) | by people |
| अकीर्तिः | अकीर्ति (१.१) | infamy |
| यदि | यदि | if |
| वा | वा | or |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| न | न | not |
| ईष्यते | ईष्यते (√इष् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is attributed |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अपि | अपि | also |
| सा | तद् (१.१) | she |
| तत् | तद् | then |
| खलु | खलु | indeed |
| न | न | not |
| ईष्यते | ईष्यते (√इष् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is attributed |
| परं | परम् | but |
| सभाश्रवःपूरतमालवल्लिताम् | सभा–श्रवस्–पूर–तमाल–वल्लिता (२.१) | the state of being a Tamala creeper filling the ears of the assembly |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | व | द | द्भी | म | सु | ते | ङ्गि | ता | त्स | खी |
| ज | नै | र | की | र्ति | र्य | दि | वा | स्य | ने | ष्य | ते |
| म | या | पि | सा | त | त्ख | लु | ने | ष्य | ते | प | रं |
| स | भा | श्र | वः | पू | र | त | मा | ल | व | ल्लि | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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