उन्मीलल्लीलनीलोत्पलदलदलनामोदमेदस्विपूर-
क्रोडक्रीडद्द्विजालीगरुदुदितमरुत्स्फालवाचालवीचिः ।
एतेनाखानि शाखानिवहनवहरित्पर्णपूर्णद्रुमाली-
व्यालीढोपान्तशान्तव्यथपथिकदृशां दत्तरागस्तडागः ॥
उन्मीलल्लीलनीलोत्पलदलदलनामोदमेदस्विपूर-
क्रोडक्रीडद्द्विजालीगरुदुदितमरुत्स्फालवाचालवीचिः ।
एतेनाखानि शाखानिवहनवहरित्पर्णपूर्णद्रुमाली-
व्यालीढोपान्तशान्तव्यथपथिकदृशां दत्तरागस्तडागः ॥
क्रोडक्रीडद्द्विजालीगरुदुदितमरुत्स्फालवाचालवीचिः ।
एतेनाखानि शाखानिवहनवहरित्पर्णपूर्णद्रुमाली-
व्यालीढोपान्तशान्तव्यथपथिकदृशां दत्तरागस्तडागः ॥
अन्वयः
AI
एतेन उन्मीलत्-लील-नील-उत्पल-दल-दलन-आमोद-मेदस्वि-पूर-क्रोड-क्रीडत्-द्विज-आली-गरुत्-उदित-मरुत्-स्फाल-वाचाल-वीचिः, शाखा-निवह-नव-हरित-पर्ण-पूर्ण-द्रुम-आली-व्यालीढ-उपान्त-शान्त-व्यथ-पथिक-दृशाम् दत्त-रागः तडागः अखानि ।
Summary
AI
By this king was dug a pond. Its waves are made noisy by the wind from the wings of birds playing in its waters, fragrant from blooming blue lotuses. Its banks, lined with lush green trees, soothe the fatigue of travelers, bringing delight to their eyes.
पदच्छेदः
AI
| उन्मीलल्लीलनीलोत्पलदलदलनामोदमेदस्विपूरक्रोडक्रीडद्द्विजालीगरुदुदितमरुत्स्फालवाचालवीचिः | उन्मीलल्लीलनीलोत्पलदलदलनामोदमेदस्विपूरक्रोडक्रीडद्द्विजालीगरुदुदितमरुत्स्फालवाचालवीचि (१.१) | whose waves are made noisy by the wind from the wings of birds playing in its fragrant waters |
| एतेन | एतद् (३.१) | by this |
| अखानि | अखानि (√खन् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was dug |
| शाखानिवहनवहरित्पर्णपूर्णद्रुमालीव्यालीढोपान्तशान्तव्यथपथिकदृशां | शाखानिवहनवहरित्पर्णपूर्णद्रुमालीव्यालीढोपान्तशान्तव्यथपथिकदृश् (६.३) | of the eyes of travelers whose fatigue is soothed by its banks, touched by rows of lush green trees |
| दत्तरागः | दत्त–राग (१.१) | which gives delight |
| तडागः | तडाग (१.१) | a pond |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्मी | ल | ल्ली | ल | नी | लो | त्प | ल | द | ल | द | ल | ना | मो | द | मे | द | स्वि | पू | र |
| क्रो | ड | क्री | ड | द्द्वि | जा | ली | ग | रु | दु | दि | त | म | रु | त्स्फा | ल | वा | चा | ल | वी | चिः |
| ए | ते | ना | खा | नि | शा | खा | नि | व | ह | न | व | ह | रि | त्प | र्ण | पू | र्ण | द्रु | मा | ली |
| व्या | ली | ढो | पा | न्त | शा | न्त | व्य | थ | प | थि | क | दृ | शां | द | त्त | रा | ग | स्त | डा | गः |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.