आलिङ्गितः कमलवत्करकस्त्वयाऽयं
श्यामः सुमेरुशिस्वयेव नवः पयोदः ।
कन्दर्पमूर्धरुहमण्डनचम्पकस्र-
ग्दामत्वदङ्गरुचिकञ्चुकितश्चकास्तु ॥
आलिङ्गितः कमलवत्करकस्त्वयाऽयं
श्यामः सुमेरुशिस्वयेव नवः पयोदः ।
कन्दर्पमूर्धरुहमण्डनचम्पकस्र-
ग्दामत्वदङ्गरुचिकञ्चुकितश्चकास्तु ॥
श्यामः सुमेरुशिस्वयेव नवः पयोदः ।
कन्दर्पमूर्धरुहमण्डनचम्पकस्र-
ग्दामत्वदङ्गरुचिकञ्चुकितश्चकास्तु ॥
अन्वयः
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त्वया आलिङ्गितः अयम् श्यामः (राजा), सुमेरुशिखया नवः पयोदः इव, (तथा) कन्दर्पमूर्धरुहमण्डनचम्पकस्रग्दाम-त्वत्-अङ्गरुचि-कञ्चुकितः (सन्) कमलवत् करकः चकास्तु ।
Summary
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Embraced by you, may this dark-complexioned king shine like a new cloud embraced by the peak of Mount Sumeru. May his hand, holding yours which is like a lotus, be covered by the radiance of your limbs, appearing like a garland of Champaka flowers adorning Kamadeva's hair.
पदच्छेदः
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| आलिङ्गितः | आलिङ्गित (आ√लिङ्ग्+क्त, १.१) | embraced |
| कमलवत् | कमलवत् | like a lotus |
| करकः | करक (१.१) | the hand |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| श्यामः | श्याम (१.१) | dark-complexioned (king) |
| सुमेरुशिखया | सुमेरु–शिखा (३.१) | by the peak of Sumeru |
| इव | इव | like |
| नवः | नव (१.१) | a new |
| पयोदः | पयोद (१.१) | cloud |
| कन्दर्पमूर्धरुहमण्डनचम्पकस्रग्दाम | कन्दर्प–मूर्धरुह–मण्डन–चम्पक–स्रज्–दामन् | the garland of Champaka flowers adorning Kamadeva's hair |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| अङ्गरुचि | अङ्ग–रुचि | the radiance of your limbs |
| कञ्चुकितः | कञ्चुकित (१.१) | covered as if by an armor |
| चकास्तु | चकास्तु (√काश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him shine |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | लि | ङ्गि | तः | क | म | ल | व | त्क | र | क | स्त्व | या | ऽयं |
| श्या | मः | सु | मे | रु | शि | स्व | ये | व | न | वः | प | यो | दः |
| क | न्द | र्प | मू | र्ध | रु | ह | म | ण्ड | न | च | म्प | क | स्र |
| ग्दा | म | त्व | द | ङ्ग | रु | चि | क | ञ्चु | कि | त | श्च | का | स्तु |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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